रायबरेली। जिले के युवाओं में आईपीएस, आईएएस या इंजीनियर बनने को लेकर भले ही होड़ दिख रही हो, लेकिन शहीद जवान शैलेंद्र प्रताप सिंह के पैतृक गांव मीर मीरानपुर (अल्हौरा) के हर युवा का सपना देश की सेवा करने का है।
यहां के युवा सुबह चार बजते ही सड़कों पर दौड़ लगाते हैं या फिर प्राथमिक स्कूल के खेल मैदान में फुटबाल खेलते हैं। गांव के युवाओं में देश प्रेम और सरहद की रक्षा करने का जज्बा किस कदर भरा है कि यहां के 40 लोग सेना, पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस महकमे में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
बड़ी संख्या में लोग इन विभागों में सेवाएं देकर रिटायर हो चुके हैं। जिला मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर मुंशीगंज-डलमऊ मार्ग पर मीर मीरानपुर (अल्हौरा) गांव को रास्ता जाता है। गांव में करीब 60 फीसदी लोग क्षत्रिय बिरादरी के लोग रहते हैं।
यह गांव श्रीनगर में सोमवार को आतंकियों से मोर्चा लेते हुए शहीद हुए सीआरपीएफ जवान शैलेंद्र प्रताप सिंह का है। यहां उनका बचपन बीता। सेना में जाने का जज्बा पैदा हुआ। यहां के लोग बताते हैं कि शैलेंद्र सुबह दौड़ लगाते थे और प्राथमिक स्कूल के खेल मैदान में फुटबाल खेलते थे।
उनकी तरह गांव के युवाओं में देश प्रेम का जज्बा कूट-कूटकर भरा है। वो भी सेना में भर्ती होकर देश के दुश्मनों को कड़ा सबक सिखाना चाहते हैं। गांव के रहने वाले अमन प्रताप सिंह इसी साल सेना में भर्ती हुए हैं। शुभम सिंह, जगजीत सिंह व धर्मेंद्र सिंह भी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं।
सुरेंद्र सिंह, रणविजय सिंह व जितेंद्र सिंह सेना के रिटायर्ड जवान हैं। जितेंद्र का बेटा दिनेश प्रताप सिंह उर्फ सत्यम देश की सेवा के लिए सरहद पर तैनात है। अवध सिंह राज आईटीबीपी डलमऊ में तैनात हैं।
रिटायर्ड जवानों का कहना है कि उनके गांव के लोग सेना, पैरामिलिट्री फोर्स या फिर पुलिस महकमे में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। काफी लोग सेवाएं देकर रिटायर हो चुके हैं। गांव के हर युवा की पहली पसंद सेना में नौकरी करने की है, क्योंकि उनमें देश प्रेम कूट-कूूटकर भरा है। (संवाद)
गांव के बेटे की शहादत से ग्रामीण हंसराज सिंह, बोधराज सिंह, मनीष सिंह, राज बहादुर सिंह की आंखें नम हैं। कहते हैं कि शैलेंद्र बहुत मिलनसार थे। छुट्टी में गांव आते थे तो सबसे मुलाकात करते थे।
शहीद के गांव में अस्पताल और बैंक की सुविधा के लिए जिला प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। गांव को आने वाली सड़क का डामरीकरण किया जाए और उस सड़क का नाम शहीद शैलेंद्र प्रताप सिंह मार्ग हो।
आतंकियों से मोर्चा लेने वाले शहीद शैलेंद्र प्रताप सिंह के घर जाने वाला रास्ता कच्चा है। मार्ग पर सिर्फ मिट्टी पड़ी है। खड़ंजा तक नहीं लगवाया गया। इसी कच्चे मार्ग से शहीद का पार्थिव शरीर उनके घर तक पहुंचेगा। इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि शहीद के घर तक खड़ंजा लगाया जाए।
सीआरपीएफ के जवान शहीद शैलेंद्र प्रताप सिंह के घर को जाने वाला कच्चा मार्ग।- फोटो : RAIBARAILY