-रायबरेली में रविवार को निर्माणाधीन विद्युत उपकेन्द्र सिरसिरा में आग लगने से जले उपकरण।
रायबरेली। सलोन क्षेत्र के सिरसिरा में बन रहे जिले के सबसे बड़े ट्रांसमिशन केंद्र में आग लगने से 10 करोड़ के उपकरण जल गए। इसमें अभियंताओं की लापरवाही सामने आई है। गंदगी व घासफूस से पटे केंद्र में आग लगी और बड़ा नुकसान हो गया। यदि समय रहते काम कराने की टेंडर प्रक्रिया हो जाती और केंद्र शुरू हो जाता तो शायद यह नौबत न आती। आग में जले उपकरणों की कीमत भले ही 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है, लेकिन मौजूदा समय में उनकी कीमत 20 करोड़ से भी ज्यादा है। आग लगने के बाद जिले से लेकर लखनऊ में बैठे अफसर तक खुद को बचाने में जुटे हैं और मंत्रणा कर रहे हैं कि इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी।
सिरसिरा में 375 करोड़ की लागत से ट्रांसमिशन केंद्र का निर्माण 2017-18 में शुरू हुआ था। इसे 2022 में पूरा हो जाना चाहिए था। शुरुआत में बीजीआर एजेंसी ने काम कराने की जिम्मेदारी ली। काम की प्रगति इतनी धीमी रही कि 2023-24 में एजेंसी को डिफाल्टर घाेषित करना पड़ा। शेष कार्य को पूरा कराने के लिए दूसरा टेंडर निकालना था। डेढ़ साल का वक्त बीत गया, लेकिन अब तक काम कराने का टेंडर नहीं निकाला गया। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया कराने की जिम्मेदारी लखनऊ में बैठे अफसरों की है। कमीशनबाजी के चलते अब तक टेंडर नहीं निकाला गया।
सुरक्षा के नहीं थे कोई इंतजाम
इतने बड़े ट्रांसमिशन केंद्र का निर्माण चल रहा था, लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। बताते हैं कि जिस समय आग लगी, उस समय ट्रांसमिशन केंद्र में कोई नहीं था। गार्ड की तैनाती थी, जो बाहर मुस्तैद थे। जब आग ने विकराल रूप धारण कर लिया तो उन्हें जानकारी हो पाई। यदि ट्रांसमिशन केंद्र के अंदर कोई होता तो आग लगने की जानकारी जल्द मिल पाती और समय से आग बुझा ली जाती।
उच्चाधिकारियों को करनी है टेंडर प्रक्रिया
ट्रांसमिशन केंद्र में आग लगने से 10 करोड़ रुपये के उपकरण जले हैं। ये उपकरण 2021 से ट्रांसमिशन में रखे हैं। मौजूदा समय में इनकी कीमत दो गुना हो गई है। बीजीआर एजेंसी के डिफाल्टर होने के बाद टेंडर प्रक्रिया उच्चाधिकारियों को करनी है। अब तक क्यों टेंडर नहीं हो पाया। इसकी जानकारी नहीं है।
-पवन कुमार, अधिशासी अभियंता ट्रांसमिशन