बिना पर्यावरण क्लियरेंस लिए ईंट भट्ठों के संचालन करने का
रास्ता साफ हो गया है। इस नियम को समाप्त कराने को लेकर जिले के 370 ईंट
भट्ठा संचालकों ने हड़ताल कर रखी थी।
हड़ताल के चलते करीब 75 हजार भट्ठा
श्रमिकों के सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया था। आदेश आने के बाद जहां
भट्ठा संचालकों में खुशी की लहर है। वहीं श्रमिकों के चेहरे भी खिल उठे
हैं।
रविवार को ईंट निर्माता संघ के बैनर तले एकत्र हुए ईंट भट्ठा संचालकों
ने अपनी खुशी का इजहार किया। सिविल लाइंस स्थित रायबरेली क्लब में बैठक हुई।
इसमें संघ के अध्यक्ष महेंद्र
पाल सिंह त्यागी ने कहा कि पर्यावरण क्लियरेंस के खिलाफ चलाया गया आंदोलन
रंग ले आया। उन्होंने कहा कि सभी भट्ठा संचालकों की एकता और धैर्य के चलते
हड़ताल कामयाब रही।
महामंत्री विमल तलरेजा ने कहा कि जिले में करीब 370 ईंट
भट्ठे हैं। यहां करीब 75 हजार श्रमिकों को रोजगार मिलता है। हड़ताल के
चलते जहां इस सीजन में पथाई का काम नहीं हुआ, वहीं श्रमिक भी बेरोजगार हो
गए थे।
उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से प्रदेश में अब ईंट भट्ठा चलाने के लिए
पर्यावरण क्लियरेंस लेने की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। यही नहीं 20
फीसदी अधिक रॉयल्टी देकर मिट्टी की ढुलाई भी करा सकेंगे।
पहले यह संभव
नहीं था। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि फरवरी से भट्ठों का संचालन शुरू
हो जाएगा। इस मौके पर राकेश जीवनानी, राम किशोर चौधरी, राकेश चंदनानी, समर
बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।