महराजगंज क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय गढ़ी मजरे अतरेहटा में अरसे से चहारदीवारी नहीं है। पढ़ाते समय अचानक छुट्टा जानवर घुस आते हैं। पढ़ाई के दौरान ही शिक्षक किसी छात्र को उसे बाहर हांकने को कहते हैं। अमर उजाला संवाददाता को इस स्कूल में बैठने की कोई व्यवस्था नजर नहीं आई।
सारे बच्चे फटे टाट-पटटी मेें बैठे नजर आए। कुछ बच्चे अपने घर से लाए बोरे पर भी बैठे दिखे। विद्यालय में बच्चों के पेयजल के लिए हैंडपंप तो लगा है लेकिन इससे पानी निकालने के लिए बच्चों को मशक्कत करनी पड़ती है। पहले नल में बाहर से लाकर पानी डाला जाता है तब पानी निकलता है।
शिवगढ़ विकास क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय गुमावां में कोई बाउंड्रीवॉल नहीं है। इस विद्यालय का परिसर भी आए दिन जानवरों का आरामगाह बना रहता है। विद्यालय के नए भवन की पोताई तो की गई है लेकिन उसके बगल में बने पुराने भवन का आज तक रंग-रोगन नहीं हुआ।
विद्यालय के सामने अक्सर जलभराव बना रहता है। इसी जलभराव के पास ही हैंडपंप लगा है। प्रसाधन व्यवस्था भी बदहाल है। अमर उजाला संवाददाता को नल के पास काफी गंदगी नजर आई। स्कूल परिसर की साफ-सफाई की ओर ध्यान नहीं दिया जाता। स्कूल के सामने खुला परिसर तो है लेकिन यह बच्चों के खेलने लायक नहीं है।
डीह ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय पूरे कनपुरिया में भी बाउंड्रीवॉल न होने से आवारा जानवरों और अराजक तत्वों की अड्डा बना रहता है। यहां साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाता है। स्कूल में अरसे से बिजली की व्यवस्था नहीं है।
काफी लिखा पढ़ी के बाद बिजली के खंभे तो लगा दिए गए हैं लेकिन आज तक तार नहीं खींचे नहीं गए हैं। जाड़े में तो किसी तरह बच्चे कक्षाओं में बैठ जाते हैं लेकिन गर्मी के मौसम में बच्चों को पेड़ के नीचे बैठना पड़ता है। प्रसाधन कक्ष भी केवल एक ही है।
अमर उजाला संवाददाता को प्रधानाध्यापक महेश नरायन पांडेय ने बताया कि स्कूल में बाउंड्रीवॉल बनवाने और बिजली कनेक्शन के लिए अफसरों को कई बार अवगत कराया गया है।
परशदेपुर क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय अहोरारामपुर। इस प्राथमिक की रंगाई पोताई तो की गई है लेकिन यहां लगा इंडिया मार्का हैंडपंप सालों से खराब है।
बच्चों को पानी के लिए अपने घरों या दूर जाना पड़ता है। इस स्कूल में भी बाउंड्रीवॉल नहीं है। परिसर में अक्सर जानवर आते जाते रहते हैं। साफ सफाई की भी कोई व्यवस्था नहीं है अमर उजाला संवाददाता को इस विद्यालय के पास ही लगा कूड़े का ढेर नजर आया।
जिससे निकलती दुर्गंध छात्रों को परेशान करती रहती है। यहां बना शौचालय सफाई न हाने के कारण बदहाल नजर आया। जरूरत पड़ने पर बच्चों को खुले में शौच जाना पड़ता है। यह चार स्कूल तो महज बानगी हैं। कमोवेश पूरे जिले के यही हालात हैं।
कहीं कोई विद्यालय संपूर्ण सुविधायुक्त नहीं है। हर साल भारी-भरकम बजट खर्च करने के बावजूद प्रदेश के बेसिक स्कूलों का हाल बेहाल हैं। अधिकतर स्कूलों में शौचालय इस्तेमाल लायक नहीं हैं। शायद ही किसी स्कूल में बच्चों को बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था हो। बड़ी तादाद में विद्यालय ऐसे हैं, जहां आज तक बिजली नहीं पहुंची है।
मालूम हो कि जिले में कुल 2154 प्राथमिक जबकि 646 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें कोई भी स्कूल पूरी तरह से सुविधायुक्त नहीं है। पानी, बिजली, चहारदीवारी, बालिका प्रसाधन आदि सुविधाओं में कोई न कोई सुविधा विद्यालयों में कम जरूर है।
स्कूलों के रखरखाव का आलम यह है कि कई प्राथमिक विद्यालयोें के खिड़की-दरवाजे टूटे पड़े हैं। कुछ स्कूलों की खिड़कियां तो चोर निकाल ले गए हैं। बैठने की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। बीएसए जीएस निरंजन का कहना है कि स्कूलों की बाउंड्रीवॉल व पेयजल व्यवस्था के लिए लिखा पढ़ी की गई है। अन्य व्यवस्थाओं को भी जल्द ही दुरुस्त कर लिया जाएगा। इसका लगातार प्रयास चल रहा है।