रायबरेली। जिले में रविवार सुबह बूंदाबांदी व तेज हवा से बिजली आपूर्ति बेपटरी हो गई। सुबह-सुबह बिजली गुल होने से जगतपुर, छतोह, गदागंज, उतरपारा उपकेंद्र से जुड़े 400 गांव के लोगों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ा। कहीं पांच तो कहीं छह घंटे बाद बिजली बहाल हो सकी। इसके बाद लोगों को राहत मिली।
ट्रांसमिशन डलमऊ से उतरपारा को जोड़ने वाली 33 केवी लाइन में सुबह सात बजे फाॅल्ट आ गया। इससे उपकेंद्र से जुड़े गांवों की बिजली गुल हो गई। कई बार बिजली आपूर्ति शुरू करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद टीम ने डलमऊ से लेकर उतरपारा तक फॉल्ट खोजा। बीच में दो जगह इंसुलेटर और एक जगह जंपर कटा मिला। इंसुलेटर और जंपर ठीक कराकर नौ बजे आपूर्ति शुरू की गई, लेकिन इसके बाद रोस्टिंग हो गई। इस कारण दोपहर 12 बजे आपूर्ति बहाल हो सकी।
इसी तरह जगतपुर, छतोह, गदागंज, उतरपारा और जमुनापुर उपकेंद्र की लाइनों में फाॅल्ट आने से बिजली गुल रही। छतोह उपकेंद्र की लाइन में फॉल्ट आने से सुबह सात से दोपहर 12 बजे तक बिजली गुल रही। जगतपुर उपकेंद्र से निकले उमरी फीडर में फाॅल्ट आया, जिसके चलते सुबह छह से दोपहर 12 बजे तक बिजली गुल रही। गदागंज और जमुनापुर उपकेंद्र की बिजली भी सुबह पांच से 11 बजे तक ठप रही। इसके चलते लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। लोगों को हैंडपंप से पानी भरकर लाना पड़ा।
अनुरक्षण कार्य के नाम पर खानापूर्ति
कहने को तो पूरे साल बिजली उपकेंद्रों और लाइनों में अनुरक्षण कार्य चलता है। इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। इसके बावजूद हवा चलने और बूंदाबादी होते ही बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है। जगतपुर के उपभोक्ता अवधपाल, महेश तिवारी, गदागंज के रामसिंह यादव ने बताया कि अनुरक्षण के नाम पर महज औपचारिकता होती है। अभी यह हाल है। गर्मी और बढ़ी तो बिजली संकट से लोगों को जूझना पड़ेगा।