अस्पताल में जनरेटर और इनवर्टर की सुविधा दोनों हैं। क्षेत्र में बिजली की किल्लत चल रही है। 24 घंटे में महज चार से पांच घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
इस तरह में अस्पताल में लगा इनवर्टर डिस्चार्ज हो जाने के बाद डॉक्टरों को मोमबत्ती का सहारा लेना पड़ता है। इससे न तो मरीज का इलाज सही से हो पता है न ही जरूरी लिखा पढ़ी।
मंगलवार को तहसील दिवस के बाद अस्पताल का निरीक्षण करने आए सीएमओ राकेश यादव से डॉक्टर दिए जाने व अन्य सुविधाओं की मांग की गई थी, लेकिन यहां तो मूलभूत सुविधा ही रोगियों को नहीं मिल पा रही है।
जनरेटर न चलने की बाबत कर्मचारियों से पूछने पर यही बताया जाता है कि डीजल न होने के कारण नहीं चल पा रहा है। देर शाम से ही पूरा अस्पताल अंधेरे में समा जाता है। इस तरह में मरीजों का इलाज हो पाना संभव नहीं है।
घोसियाना मोहल्ला निवासी हरिप्रकाश, गायत्री पुरम निवासी रवि प्रकाश, मनोज कुमार गुप्ता, शिवराज सहित तमाम लोगों ने डीएम से आपातकालीन ड्यूटी में जनरेटर चलवाए जाने की मांग की है। अधीक्षक डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने बताया कि प्रतिदिन दो से तीन घंटे जनरेटर रात में चलवाया जा रहा है।