मोन गांव में कुत्ते के काटने के बाद वृद्ध की मौत के बाद जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम।
रायबरेली। महराजगंज के मोन गांव में कुत्ते के काटने के बाद रेबीज से एक वृद्ध की मौत हो गई। समय से एआरवी (एंटी रेबीज वेनम) और सीरम लगने के बाद भी महज 26 दिन में वृद्ध की मौत का प्रमुख कारण आंख के ऊपर कुत्ते का काटना पाया गया है। मंगलवार को जांच करके लौटे एपिडियोलॉजिस्ट डॉ. ऋषि बागची ने बताया कि रेबीज का संक्रमण प्रति दिन 12 मिली सेंटीमीटर सेंट्रल नर्वस सिस्टम (सीएनएस) की ओर बढ़ता है। आंख के ऊपर कुत्ते ने काटा था। इसी कारण संक्रमण सीएनएस तक पहुंच गया।
डॉ. बागची ने बताया कि बुजुर्ग को बीती 13 जुलाई को कुत्ते ने हाथ पैर के साथ ही आंख के ऊपर काटा था। उसे एआरवी के दो टीके लगने के साथ ही सीरम का टीका भी लगाया गया था। हाथ और पैर में आई चोट का असर सिर तक नहीं पहुंचा, लेकिन आंख के ऊपर गंभीर चोट की वजह से संक्रमण तेजी से सिर तक पहुंचने से वृद्ध की मौत हुई थी। उन्होंने बताया कि उसी दिन कुत्ते ने करीब 11 और लोगों के हाथ व पैर में काटा था। अन्य सभी मरीज स्वस्थ हैं।
बीती 13 जुलाई की रात मोन गांव में कुत्ते ने कई लोगों पर हमला बोला था। बाबा ओरिदास मंदिर के पास सो रहे कमलेश और रामाशंकर के हाथों पर जख्म दिया था। नलकूप पर सो रहे विजय प्रताप सिंह के सीने में काट लिया। गांव के शिवप्रसाद, राजेश, शिवम और रीता समेत करीब 12 लोगों को घायल कर दिया। चौहान पासी को हाथ और पैर के साथ ही आंख के ऊपर भी कुत्ते से काटकर घायल कर दिया था। बीती आठ अगस्त को उनकी मौत हो गई थी। महराजगंज सीएचसी अधीक्षक गणनायक पांडेय ने बताया कि शेष अन्य मरीज स्वस्थ हैं।
पांच महीने पहले महिला प्रधान की हो चुकी है मौत
महराजगंज के मझिगवां की प्रधान रेखा को सात मार्च को कुत्ते ने काट लिया था। उन्होंने भी झाड़-फूंक के चक्कर में पड़कर पहली डोज करीब 10 दिन बाद लगवाई थी। हालत बिगड़ने पर उन्हें घर वाले लखनऊ में इलाज कराने ले गए थे जहां एक अप्रैल को उनकी मौत हो गई थी।