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जर्जर छत के नीचे बैठकर भविष्य बना रहे नौनिहाल

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महराजगंज (रायबरेली)। सर्व शिक्षा अभियान के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं, लेकिन विद्यालयों की दशा में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
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महराजगंज क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय, जमुरावां में नौनिहाल जर्जर भवन के नीचे बैठकर अपना भविष्य बना रहे हैं। जर्जर भवन कभी भी ढह सकता है। विद्यालय की दशा सुधारने के लिए कई बार अधिकारियों को लिखा-पढ़ी की गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।
महराजगंज ब्लॉक के जमुरावां कंपोजिट विद्यालय की छत पर दरारें पड़ गईं हैं। दीवारें जर्जर हैं। विद्यालय में 400 बच्चे पंजीकृत हैं, जो जर्जर भवन के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
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इंचार्ज प्रधानाध्यापिका शकुंतला ने बताया कि भवन के जर्जर होने से अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते हैं। उन्होंने बताया कि सर्दी में तो बच्चों को बाहर बैठाकर पढ़ाई कराई जाती थी, लेकिन अब भीषण गर्मी में बच्चों को बाहर बैठाना ठीक नहीं है।
20 साल में बदहाल हो गया भवन
महराजगंज। कंपोजिट विद्यालय की इंचार्ज प्रधानाध्यापक शकुंतला देवी ने बताया कि निर्माण प्रभारी रीवां गांव निवासी रामचंद्र द्विवेदी ने 2004 में इस भवन को बनवाया था। यह जूनियर का भवन है, इसमें पठन-पाठन के लिए तीन कमरे तथा प्रधानाचार्य कक्ष व बरामदा बना है, जो बारिश के दिनों में टपकता है।
इससे बच्चों के बैठने में दिक्कत होती है। पिछले तीन साल में दो लाख 75 हजार रुपए कंपोजिट धनराशि विद्यालय को दी गई है। इसमें खिड़की, दरवाजे, टेबल, रंगाई-पुताई आदि मेंटेनेंस व सामग्री खरीदने में खर्च हो गए। ग्राम पंचायत द्वारा बीते पंचवर्षीय कार्यकाल में सिर्फ प्राथमिक विद्यालय को कायाकल्प के अंतर्गत लेकर काम कराया गया, लेकिन जूनियर विद्यालय को कायाकल्प में नहीं लिया गया।
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विद्यालय का भवन कितना जर्जर है। यह तय करना तकनीकी टीम का काम है। कहा कि वह अपने स्तर से विद्यालय का निरीक्षण कर उच्चाधिकारियों को अवगत कराएंगे। तकनीकी टीम भेजकर भवन का सर्वे कराया जाएगा, सर्वे में मिली रिपोर्ट के आधार पर उच्चाधिकारी को अग्रिम कार्रवाई के लिए प्रेषित किया जाएगा।
-सुरेश कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी, महराजगंज
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