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नशे की लत ने लाला को जुर्म के दलदल में धकेला, जमील को भारी पड़ी उससे नजदीकी

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ऊंचाहार (रायबरेली)। नशे की लत ने लाला उर्फ मूलचंद्र उर्फ साजू और जमील शेख को आतंकवादी बना दिया। तो लाला के संग दोस्ती जमील को भारी पड़ी। मंगलवार को एटीएस ने लाला के साथ पकड़े गए उसके साथी जमील से पूछताछ की। देर रात दिल्ली ने एटीएम ने जमील को छोड़ दिया।
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एटीएस के सूत्रों की मानें तो प्रयागराज से पकड़े गए संदिग्ध आतंकी जीशान शेख के घर के पास ही लाला की बहन का घर है। लाला का अपनी बहन के घर आना-जाना था। इसी दौरान लाला जीशान के संपर्क में आया। लाला की अपने गांव के रहने वाले जमील से गहरी दोस्ती थी। उधर, एटीएस कई दिनों से गांव में टोह ले रही थी। जब लाला पकड़ा गया तो टीम ने उसके खास साथी जमील को भी पकड़ा।
संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में पकड़ा गया लाला इंटर पास था, जबकि जमील शेख ने पढ़ाई नहीं की थी। बताते हैं कि दोनों नशे के आदी थे। गांव के लोगों की मानें तो आंख खुलने के साथ ही गांजे की कस लगनी शुरू हो जाती थी। इसी वजह से जमील भी एटीएस के रडार पर आ गया।
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हालांकि दोनों के घरवाले लाला और जमील के कभी भी गांव से बाहर न जाने की बात कह रहे हैं। ग्राम प्रधान शिवमूरत तिवारी ने बताया कि दोनों नशे के आदी थे। मूलचंद्र खेती करता था, जबकि जमील को खर्च के लिए उसका पिता पैसा देता है। दोनों नशे के आदी थे, लेकिन गांव में कभी कोई विवाद नहीं किया।
इसलिए दोनों उन्हें निर्दोष लग रहे हैं। पुलिस को ठीक से जांच करनी चाहिए। गांव में सन्नाटा पसरा है। लोग दहशत में हैं। नशा करने वाले कुछ युवक डर के मारे गांव से पलायन तक कर गए हैं। उधर, एटीएस ने दिल्ली में बुधवार देर रात जमील को छोड़ दिया। यह खबर उसके घर पहुंची तो परिवारीजनों के खुशी के आंसू छलक पड़े।
लोन और कोरोना जांच के बहाने एटीएस ने पकड़ा
ऊंचाहार। गांव के दोनों युवकों के आतंकियों से कनेक्शन की जानकारी होने के बाद एटीएस एक हफ्ते से गांव के चक्कर लगा रही थी। एटीएस के अधिकारी कभी बैंक मैनेजर बनकर लोन बांटने तो कभी कोरोना की जांच करने के बहाने गांव की खाक छान रहे थे। उन पर गांव के किसी व्यक्ति को शक नहीं हुआ।
यही कारण है कि जब एकाएक टीम ने दो युवकों को घर से उठाया तो गांव में हड़कंप मच गया। शाम को जब खबर वायरल हुई तो लोगों को कई दिन से गांव में एटीएस के होने की बात पता चली।
जमील शेख के पिता साबिर शेख ने बताया कि दो दिन पहले दो लोग आए और दरवाजे पर खड़े होकर बैंक से आने की बात कही। दोनों ने कहा कि लोग लोन ले लेते हैं और अदा नहीं करते। धूप तेज थी तो हमने अंदर आकर बैठने को कहा।
दोनों अंदर आए और कुर्सी पर बैठ गए। आसपास के लोगों व मेरे बेटों के नाम पूछे। उनके रोजगार की जानकारी ली। जाते समय कहा कि लोन लेना हो तो बताना आप। अच्छे आदमी हो हम आपको लोन देंगे। वहीं मूलचंद्र की पत्नी सुधा की मानें तो दो दिन पहले दो लोग घर आए थे। उन्होंने कहा कि हम कोरोना की जांच करने आए हैं। हमने जांच कराने से मना कर दिया था। इसके बाद इधर उधर ताक-झांक किए और चले गए।
एमए तक पढ़ी है लाला की पत्नी
लाला की पत्नी सुधा श्रीवास्तव एमए तक पढ़ी है। बेटा दसवीं पास कर चुका है। ग्यारहवीं में उसका एडमिशन होना है, जबकि बेटी कक्षा आठ पास करने के बाद नौवी में एडमिशन कराने की तैयारी में है। सुधा ने पति के किसी भी आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की बात से साफ इंकार कर दिया।
उसने बताया कि एटीएस के लोग जबरन मेरे घर में घुस गए थे। मैं नहाने के बाद आधे कपड़े ही पहन पाई थी कि सब वहां पहुंचे और जबरन मेरा व मेरे बेटे का मोबाइल छीन लिए। पति खेत गए थे। बुलाने पर आए तो उनको पकड़ लिया और लेकर चले गए। ये भी नहीं बताया कि कौन हैं, कहां से आए हैं। पूछने पर मेरे साथ गाली-गलौज की। पत्नी ने पति को फर्जी फंसाने का आरोप लगाया और सरकार से न्याय की गुहार लगाई।
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