रायबरेली। जूनियरों के भरोसे अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) का काम काज नहीं चलेगा। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सभी जूनियर डॉक्टरों से सीएचसी का कार्यभार छीन कर सीनियर डॉक्टरों को सौंपा जाएगा।
इस संबंध में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अपर निदेशक ने जूनियर डॉक्टरों से सीएचसी अधीक्षक का चार्ज वापस लेकर इन सभी पदों पर लेवल-3 स्तर के डॉक्टरों को ही अधीक्षक बनाने का आदेश जारी किया है। इस निर्देश के बाद जिले के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े डॉक्टरों में हड़कंप है।
नियमानुसार लेवल-3 स्तर के डॉक्टरों को ही सीएचसी का अधीक्षक बनाया जाना चाहिए। इसके बावजूद जिले में जोड़तोड़ व सेटिंग के दम पर आधी से अधिक सीएचसी का प्रभार लेवल एक स्तर के जूनियर डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है।
जिले में 18 सीएचसी हैं। बछरावां, सलोन, जगतपुर, महराजगंज, ऊंचाहार के अधीक्षकों का प्रमोशन लेवल-4 में होने के बाद अब यह सीएचसी जूनियरों के भरोसे संचालित हैं। जिले की सरेनी, खीरों, नसीराबाद, ऊंचाहार, डीह सीएचसी लेवल-3 स्तर से जूनियर डॉक्टर संभाले हैं। ऐसी दशा में शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
बताते हैं कि कई सीनियर डॉक्टरों को अस्पतालों में तैनात तो किया गया है लेकिन उन्हें सीएचसी का चार्ज नहीं दिया गया। इसके चलते ऐसे सीनियरों को अपने जूनियर के अधीनस्थ होकर कार्य करना पड़ रहा है।
नियमानुसार, सीनियर डॉक्टरों को ही सीएचसी अधीक्षक बनाने की व्यवस्था है लेकिन जिले में लंबे समय से इसकी अनदेखी की जा रही है। अब चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर निदेशक ने सीएमओ को पत्र जारी करके लेवल-3 स्तर के डॉक्टरों को ही अधीक्षक बनाने के आदेश देकर जूनियरों से प्रभारी का चार्ज हटाने को कहा गया है।
आदेश के बाद भी जारी है संबद्धता, डॉक्टर मौज में
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग में सभी पदों की संबद्धता को खत्म करने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में शासन से पत्र भी आ चुका है, लेकिन जिले में आदेश का अनुपालन अब तक नहीं कराया गया है। करीब 80 डॉक्टर व अन्य स्टाफ संबद्धता के सहारे मौज काट रहा है। खासकर जिला अस्पताल में आधा दर्ज चिकित्सक संबद्ध है लेकिन अब तक उनकी संबद्धता को खत्म नहीं किया गया है।
सीएचसी का चार्ज लेवल-3 स्तर के डॉक्टरों को देने के आदेश हैं, लेकिन जिले में सीनियर डॉक्टरों की कमी है। ऐसे में जूनियर डॉक्टरों से सीएचसी का संचालन कराया जा रहा है। नए बाबुओं के आने के बाद ही आदेश के अनुपालन में आगे की कार्रवाई हो सकेगी।
डॉ. खालिद रिजवान, प्रभारी सीएमओ