पहले चरण में इकाई खोलने के लिए 33 लाख रुपये स्वास्थ्य विभाग को दिए गए हैं। इस इकाई के खुलने के बाद नवजात के इलाज के लिए लोगों को निजी अस्पतालों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा और न ही आर्थिक बोझ पडे़गा।
यूनिट में एक साथ 10 नवजातों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा सकेगा। जिले के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान कई नवजात की हालत खराब हो जाती है।
खासकर जिला महिला अस्पताल में क्रिटिकल केस आने के कारण हमेशा यह समस्या सामने रहती है। समय से इलाज न हो से नवजात की मौत भी हो जाती है।
अभी जिला महिला अस्पताल में नवजात के इलाज के लिए कोई बंदोबस्त नहीं हैं। नवजात के इलाज के लिए लोगों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों की समस्या के निदान के लिए जिला महिला अस्पताल में एसएनसीयू खोलने का निर्णय लिया है। एसएनसीयू के लिए पहली किस्त के रूप में स्वास्थ्य विभाग को 33 लाख रुपये दिए गए हैं।
यूनिट में आईसीयू के साथ ही अन्य सुविधाएं नवजात के इलाज के लिए होंगी। बाल रोग विशेषज्ञों के अलावा अन्य स्टाफ की व्यवस्था होगी।
अनुमति मिलने के बाद जिला महिला अस्पताल में यूनिट खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रयास किया जा रहा है कि अस्पताल के भवन में ही यूनिट को शुरू करा दिया जाए। बाद में अलग से भवन का निर्माण कराया जाएगा।
सीएमओ डॉ. राकेश कुमार यादव सिक न्यू बॉर्न केयर इकाई के लिए 33 लाख रुपये मिले हैं। यह इकाई जिला महिला अस्पताल में खुलेगी।
नवजात के इलाज के लिए हर संभव सुविधाएं इकाई में उपलब्ध कराई जाएगी। इकाई खोलने के लिए प्रक्रिया को पूरा कराया जा रहा है। इकाई खुल जाने के बाद निश्चित ही नवजात की मौत को रोका जा सकेगा।