रायबरेली। रेलकोच कारखाने के एल-2 अस्पताल में शुक्रवार को एक बार फिर डॉक्टरों की संवेदनहीनता सामने आ गई। साढ़े तीन घंटे तक हॉस्पिटल के गेट पर ही एंबुलेंस में रिटायर्ड कर्मचारी तड़पता रहा, लेकिन डॉक्टर व अन्य चिकित्सीय स्टाफ ने ऑक्सीजन न होने का बहना बनाकर भर्ती नहीं किया।
संक्रमण के चलते मरीज को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। रिटायर्ड कर्मचारी श्याम सुंदर पांडेय के बेटे ने बार-बार डॉक्टरों से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने भी नहीं सुनी। दोपहर करीब 12:15 बजे मरीज ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया। बेटे ने लापरवाही का यह वीडियो वायरल कर डीएम और सीएमओ से जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
राही ब्लॉक क्षेत्र के सुल्तानपुर आइमा गांव निवासी रिटायर्ड सिंचाई कर्मचारी की रिपोर्ट गत गुरुवार को पॉजिटिव आई थी। मरीज को होम आइसोलेट कर दिया गया, लेकिन शुक्रवार सुबह मरीज को सांस लेने में समस्या होने लगी।
बेटे अरविंद पांडेय ने 108 एंबुलेंस बुलाकर मरीज को सुबह नौ बजे रेलकोच कारखाने के एल-2 अस्पताल पहुंचाया। गेट पर एंबुलेंस खड़ी हो गई। अस्पताल में स्टाफ को मरीज के संबंध में सूचना भी दी गई, लेकिन एक घंटे तक कोई नहीं आया।
परिवारीजनों ने अस्पताल के अंदर जाकर जो भी स्टाफ मिला उससे मरीज को एंबुलेंस से उतार कर इलाज करने की गुहार लगाई, लेकिन सभी ने ऑक्सीजन न होने का बहाना कर मरीज को एंबुलेंस से नहीं उतारा। इस दौरान अरविंद की हालत बिगड़ गई। दोपहर 12:15 बजे मरीज ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। इससे गुस्साए परिवारीजनों ने हंगामा किया, लेकिन अस्पताल से कोई भी बाहर नहीं निकला।
मामले में परिवारीजनों ने अस्पताल में बरती जा रही लापरवाही का वीडियो भी बना लिया और उसे वायरल कर दिया। मृतक के बेटे अरविंद पांडेय का कहना है कि सवा तीन घंटे तक एल-2 अस्पताल के गेट पर पिता को भर्ती कराने का प्रयास किया, लेकिन अस्पताल में ऑक्सीजन न होने का बहाना करके मरीज को भर्ती नहीं किया। समय से इलाज हो गया होता तो जान बच जाती है। अरविंद ने मामले में डीएम व सीएमओ से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
एंबुलेंस में जब तक रही ऑक्सीजन, तब तक चलीं सांसें
एंबुलेंसों में लगे सिलेंडरों से चार से पांच घंटे तक ही ऑक्सीजन मरीज को दी जा सकती है। एल-2 अस्पताल के गेट पर एंबुलेंस में जितनी ऑक्सीजन थी, उतने समय ही मरीज की सांसें चलीं। ऑक्सीजन खत्म होने के बाद मरीज की जान चली गई। हालांकि समय से इलाज शुरू हो जाता तो मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं थी। बिना ऑक्सीजन के मरीज को एंबुलेंस से उतारना खतरे से खाली नहीं था। मरीज की हालत काफी नाजुक थी। एंबुलेंस में ऑक्सीजन लगी हुई थी। स्थिति गंभीर होने के कारण ही मरीज की मौत हो गई है।
डॉ. राजकिशोर तिवारी, अधीक्षक एल-2 अस्पताल रेलकोच
मामले को दिखवाया जाएगा। एल-2 में ऑक्सीजन की बड़ी समस्या है। पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एंबुलेंस में ऑक्सीजन की व्यवस्था होने के कारण ही मरीज को नहीं उतारा गया। इलाज में हर संभव मरीज को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. बीरेंद्र सिंह, सीएमओ