पौष माह की पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने अलग-अलग गंगा तटों पर डुबकी लगाई। सबसे ज्यादा भीड़ डलमऊ के घाटों पर रही। इसके अलावा ऊंचाहार के गोकना, सरेनी के रालपुर गंगा तट पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा।
डलमऊ में कुछ स्थानों पर अलाव जलवाए गए, जबकि अन्य गंगा तटों पर श्रद्धालुओं को सर्दी में ठिठुरना पड़ा। अलाव की व्यवस्था न होने से लोगों ने होटलों पर जल रहीं भट्ठियों का सहारा लिया।
डलमऊ के किला घाट, सड़क घाट, रानी शिवाला घाट, पक्का घाट, संकट मोचन घाट, पथवारी घाट, शुकुल घाट, महावीरन घाट, श्मशान घाट पर सुबह से ही स्नान के लिए भक्तों की भीड़ जमा हो गई थी।
स्नान के बाद तटों पर स्थित मंदिरों में पूजा अर्चना की। कड़कड़ाती ठंड में अलाव नहीं जलने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। नगर पंचायत अध्यक्ष बृजेश दत्त ने बताया कि कई जगह अलाव जलवाए गए हैं।
साथ ही कई जगह रैन बसेरे भी बनवाए गए, ताकि दूर से आने वाले स्नानार्थी यही पर विश्राम कर सके। इसी तरह ऊंचाहार के गोकना और सरेनी के रालपुर गंगा तट पर स्नानार्थियों ने स्नान किया। सर्दी होने के कारण यहां पर लोगों की भीड़ कम थी। साथ ही आए श्रद्धालुओं के लिए कोई उचित प्रबंध नहीं किया गया।
क्रॉसिंग बंद होने से लगा जाम
डलमऊ। मुराईबाग स्थित रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से काफी देर तक अफरातफरी का माहौल रहा। दोनों तरफ से वाहनों की लाइन लगी रही। इससे श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। करीब एक घंटे तक व्यवस्था रही।