मामूली बात पर व गांव में अपना आतंक कायम रखने के लिए एक दंपती के हत्यारे राहुल सिंह उर्फ गोविंद सिंह को बृहस्पतिवार को जिला जज ने फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसमें से 20 हजार रुपये दंपती की बेटी कुंती को देने का आदेश दिया गया है।
जिला जज ने इस प्रकरण को बिरल से बिरलतम मानते हुए फैसले में कहा कि ऐसे दुर्दांत हत्यारे को दुनिया में रहने का कोई अधिकार नहीं है। सजा के बाद राहुल को फिर जेल भेज दिया गया। डलमऊ कोतवाली क्षेत्र के बलीपुर गांव निवासी राजू और पत्नी मंजू देवी अपनी बेटी कुंती के साथ रहते थे।
एफआईआर के मुताबिक तीन-चार सितंबर 2010 की रात राहुल सिंह अपने साथियों के साथ बलीपुर गांव पहुंचा और राजू से पानी मांगा। पानी पीने के बाद राहुल ने राजू को छोटू नेता को बुलाने के लिए भेजा। राजू छोटू नेता को बुलाने चंदी का पुरवा चला गया, लेकिन लौटा तो उसके साथ छोटू नेता नहीं था।
इस पर आक्रोशित राहुल सिंह ने मंजू देवी को घर के अंदर बंद कर दिया और राजू की बाग में ले जाकर गला दबाकर हत्या कर शव पेड़ से लटका दिया। इसके बाद राहुल और उसके साथी वापस आए और मंजू देवी की आंखों में पट्टी बांधकर उसे भी बाग की तरफ ले गए और मारकर पेड़ में लटका दिया।
इधर, बेटी कुंती ने चीख पुकार मचाई तो घर वाले एकत्र हुए और बाग जाकर देखा तो दोनों के शव लटके हुए थे। मामले में बेटी कुंती ने पूरे बैरहना मजरे बलीपुर निवासी राहुल सिंह पुत्र रतीभान सिंह और उसके दो साथियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई।
छह साल नौ महीने बाद बुधवार को जिला जज के. के. शर्मा की कोर्ट ने आरोपी राहुल सिंह के खिलाफ दोष सिद्ध किया और गुरुवार को उसे फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए धर्मेद्र उर्फ डीके पुत्र महादेव निवासी नेवाजगंज और रामदीन उर्फ रामजी बाबा पुत्र रामसुमेर उर्फ रामसुमिरन निवासी बहोलन का पुरवा को बरी कर दिया।
अदालत ने कहा कि अपराधी ने पहले घर जाकर पानी पिया और जब उसने किसी को बुलाने भेजा तो वह नहीं आया और दंपती की हत्या कर दी। यह दोहरा हत्याकांड बिरल से बिरलतम अपराध की श्रेणी में आता है। दंपती की हत्या इस इरादे से की गई, ताकि अपराधी का इलाके में आतंक व भय पैदा हो जाए।
ऐसे अभियुक्त को दुनिया में रहने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे लोग जमानत पाकर, जेल से बाहर आकर, जघन्य अपराध कर सकते हैं। ऐसे में दुर्दांत अभियुक्त को फांसी की सजा दी जाती है, ताकि समाज पर इसका ठीक प्रभाव पड़े और ऐसा कृत्य करने वाले अपराधियों को सबक मिले।
इस मामले में कुंती ही मुख्य साक्ष्य है। उसने हिम्मत दिखाते हुए दुर्दांत अपराधी के खिलाफ एफआईआर लिखाकर साक्ष्य प्रस्तुत किया है। ऐसे में राहुल सिंह उर्फ गोविंद सिंह को मृत्युदंड की सजा देने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।