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मैं केंद्र प्रभारी बोल रहा हूं...गेहूं लेकर आओ, तौल कराओ और घर जाओ

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रायबरेली। ...मैं केंद्र प्रभारी बोल रहा हूं। ...भाई साहब अपना गेहूं लेकर केंद्र पर आओ, बिना किसी परेशानी के तौल कराओ और फिर घर जाओ।
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सरकारी क्रय केंद्रों से कृषकों के किनारा कसने पर अब कुछ इसी तरह केंद्र प्रभारियों की तरफ से फोन करके उन किसानों को गेहूं तौल कराने के लिए केंद्रों पर बुलाया जा रहा है, जिन्होंने हाल में ही अपना धान तौलाया था।
उच्चाधिकारियों के बढ़ते दबाव के चलते खरीद से जुड़े अधिकारियों में हड़कंप मचा है और वह खरीद का तय लक्ष्य हासिल करने के लिए किसानों को फोन कर रहे हैं।
जिले में एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हुई है, लेकिन खरीद व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। अधिकतर केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है।
इसकी मुुख्य वजह है कि तय सरकारी रेट के सापेक्ष बाजार में ही गेहूं दो हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है। केंद्रों पर मनमानी को देखते हुए किसान बाजार में ही गेहूं बेच रहा है।
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जिले में इस बार 35 हजार किसानों ने सरकारी केंद्रों पर धान की बिक्री की थी। अब धान बिक्री करने वाले किसानों को केंद्र प्रभारी फोन करके गेहूं भी सरकारी क्रय केंद्रों पर तौल कराने की सिफारिश कर रहे हैं।
24 दिन में महज छह हजार क्विंटल खरीद
जिले में गेहूं खरीद व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 24 दिन में महज छह हजार क्विंटल गेहूं ही सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदा गया है।
तल्ख भरी धूप में प्रभारी केंद्रों पर बैठकर किसानों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इक्का-दुक्का किसान ही केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। इस बार जिले में 82 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है।
कुल केंद्रों की संख्या हुई अब 100
जिले में अब गेहूं क्रय केंद्रों की संख्या 100 हो गई है। इससे पहले 78 क्रय केंद्र खोले गए थे। डीएम के निर्देश पर 22 क्रय केंद्र और खोले गए। केंद्रों को बढ़ाए जाने का मकसद है कि गेहूं खरीद तेजी के साथ की जाए, लेकिन सवाल उठ रहा है कि जब किसान ही केंद्रों पर नहीं पहुंच रहा है तो खरीद कैसे हो।
फोन कर रहे हैं, लेकिन बाजार में बेचना रहता ठीक
गदागंज। दीनशाहगौरा ब्लॉक क्षेत्र के सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। किसान गेहूं बेचने के लिए केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं। किसान रामचंद्र, देवतादीन, राम आसरे ने बताया कि केंद्र प्रभारियों की ओर से उन्हें फोन करके केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए कहा जा रहा है। केंद्र तक गेहूं ले जाने में भाड़ा भी देना पड़ता है। पूरा दिन लग जाता है। इसलिए बाजार में ही गेहूं बेच लेते हैं। रेट भी अच्छा मिल जाता है।
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गेहूं खरीद बढ़ाने के लिए केंद्र प्रभारियों से उन 35 हजार किसानों को फोन कराया जा रहा है, जिन्होंने हाल में ही अपना धान सरकारी केंद्रों पर बेचा था। पूरा प्रयास किया जा रहा है कि जो लक्ष्य तय किया गया है, उसे पूरा किया जाए।
रामानंद जायसवाल, डिप्टी आरएमओ
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