गेहूं की फसल बर्बाद होने के बाद किसानों ने किसी तरह धान की रोपाई और अरहर, गन्ना, अरहर, उड़द, तिल आदि फसलों की बोवाई की थी। अब जब फसल कुछ बड़ी हुई तो बारिश ने अरमानों पर पानी फेर दिया।
खासकर धान की फसल अधिक प्रभावित है। एक लाख 43 हजार 86 हेक्टेयर पर धान की रोपाई की गई थी। इसमें बछरावां, महराजगंज, हरचंदपुर, लालगंज, अमावां, डलमऊ क्षेत्रों में धान की रोपाई अधिक होती है।
पानी बिना फसल जहां सूख रही है, वहीं लपेटक रोग का असर तेजी से बढ़ रहा है। लपेटक रोग में धान की फसल की पत्तियां सूखकर पीली पड़ने लगती हैं।
राही ब्लॉक क्षेत्र के पूरे शिवा का पुरवा मजरे खागीपुर सड़वा के किसानों ने खेतों में खड़ी धान की फसल को काटकर जानवरों को खिला रहे हैं। यही नहीं कई किसान ऐसे हैं, जो खेत में धान की फसल खड़ी है, लेकिन उसकी जोताई किए दे रहे हैं। सिर्फ इसी गांव में नहीं, बल्कि इसी ब्लॉक क्षेत्र के मनहेरू, जफरापुर, मटरू का पुरवा आदि गांव में भी यही हाल है।
जिला कृषि अधिकारी सतीश पांडेय का कहना है कि बारिश न होने के कारण धान, उड़द, अरहर आदि की फसलें बर्बाद हुई हैं। जिससे किसान परेशान हैं। नहरों और सरकारी नलकूपों के माध्यम से किसानों की फसलों की सिंचाई कराने की व्यवस्था कराई जा रही है।
शासन के निर्देश पर नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद ही पता चलेगा कि कितनी फसल सूखे से बर्बाद हुई है। वैसे इस बार अधिक फसल बर्बाद हुई है, जिसके चलते उत्पादन घटना तय है।,