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बनारस में मिला नवजात को जीवनदान, रीढ़ की हड्डी के जन्मजात फोड़े का ऑपरेशन

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रायबरेली। सीएचसी लालगंज में 20 जुलाई को जन्म लेने के बाद नवजात की रीढ़ की हड्डी पर ऐसा फोड़ा मिला जिसने पूरे परिवार को परेशान कर दिया। उसको जिला अस्पताल भेजा गया लेकिन वहां भी इलाज की सुविधा न होने पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) से इलाज ही एकमात्र सहारा नजर आया।
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सीएमओ ने नवजात को वाराणसी भेजा जहां ऑपरेशन के बाद नवजात को जीवनदान मिल गया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। सरेनी निवासी उमेश कुमार व पूजा के बच्चे को जन्म से ही न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (रीढ़ की हड्डी में फोड़े की समस्या) रोग से ग्रसित पाया गया।
उसे लालगंज से जिला अस्पताल रेफर किया गया लेकिन जिले में इलाज की सुविधा न होने के कारण सीएमएस ने उसे सीएमओ के पास भेज दिया। सीएमओ ने नवजात को 26 जुलाई को वाराणसी के बीएचयू अस्पताल भेजा।
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27 जुलाई को नवजात की रीढ़ की हड्डी के फोड़े का ऑपरेशन होने के बाद उसे 2 अगस्त को डिस्चार्ज कर दिया गया। डीईआईसी मैनेजर नितेश जायसवाल व वाराणसी के मैनेजर डॉ. अभिषेक त्रिपाठी द्वारा मुफ्त ऑपरेशन किया गया।
शनिवार को टांका कटवाने के लिए बच्चे को यहां लाया गया। एसीएमओ डॉ. नागेंद्र प्रसाद ने टांका कटने के बाद फिर से परीक्षण किया। फोड़ा अब पूरी तरह ठीक हो गया है।
एसीएमओ व आरबीएसके के नोडल अधिकारी नागेंद्र प्रसाद ने बताया कि न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का ऑपरेशन झांसी व वाराणसी के अस्पताल में ही उपलब्ध है। यह जन्मजात बीमारी है। इसका तुरंत ऑपरेशन न होने पर बड़ी समस्या आ सकती है। नवजात का सफल ऑपरेशन करवाया गया है। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। यह जिले का पहला केस था।
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