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एसटीएफ ने फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ किया सीन री-क्रिएट

Mon, 29 Feb 2016 11:27 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
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राजधानी लखनऊ के साउथ सिटी, रुचिखंड निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर आशीष कुमार द्विवेदी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच करने सोमवार को एसटीएफ रायबरेली पहुंची। एसटीएफ यहां क्राइम सीन री-क्रियेट कराकर किसी नतीजे तक पहुंचने की कोशिश की।
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इससे पहले यह जांच लखनऊ क्राइम ब्रांच कर रही थी। आशीष के परिवारीजनों ने राज्यपाल, सीएम और डीजीपी से मिलकर आशीष की हत्या की बात कहते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी।

सोमवार को एसटीएफ के एएसपी और विधि विज्ञान प्रयोगशाला के डायरेक्टर की अगुवाई में यहां पहुंची टीम ने तकरीबन दो घंटे तक पड़ताल की और जानने का प्रयास किया कि आशीष की मौत की असल वजह क्या है।
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टीम ने न सिर्फ घटनास्थल का जायजा लिया, बल्कि पुलिस की ओर से की गई जांच के सारे दस्तावेज भी खंगाले। साथ ही आम लोगों के साथ पुलिस कर्मियों और अफसरों से इस घटना को लेकर पूछताछ की।

एसटीएफ के एएसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी के नेतृत्व में विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ उत्तर प्रदेश के डायरेक्टर श्याम बिहारी उपाध्याय, डिप्टी डायरेक्टर जी.खान टीम के साथ दोपहर बाद सोमवार को हरचंदपुर थाने पहुंचे।

सबसे पहले टीम घटनास्थल पर पहुंची, जहां पर यह आशीष जला अवस्था में पाया गया था। एसटीएफ व फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने सोमवार को मौके पर पड़ताल कर सीन री-क्रियेट किया।

इसके साथ ही हरचंदपुर पुलिस द्वारा की गई छानबीन व केस डायरी की जानकारी की। आशीष के पिता अशोक कुमार दुबे सेना में सूबेदार के पद पर कानपुर में तैनात हैं। आशीष उनका इकलौता बेटा था।

वह लॉरेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से खुद की आईटी कंपनी चलाता था। 23 दिसंबर 2014 को हरचंदपुर पुलिस ने फोन पर उसके पिता को यह सूचना दी कि उनके बेटे का जला हुआ शव रायबरेली के हरचंदपुर कस्बे के पास लखनऊ-इलाहाबाद हाईवे पर पड़ा मिला है।

पास ही आशीष की बाइक भी जली पड़ी थी। पुलिस ने इसे हादसे के दौरान आशीष की बाइक से पेट्रोल निकलने और आग लगने से उसके जलने की थ्योरी बताई थी। जबकि परिवारीजन इसे हत्या बता रहे थे।

आशीष के पिता ने बताया कि आशीष को साथ काम करने वाला उन्नाव निवासी मानवेंद्र सिंह बुलाकर ले गया था। आशीष 22 दिसंबर की रात को अपनी मां से यह कह कर गया था कि मानवेंद्र घर में अकेला है और वह उसके यहां सोने जा रहा है।

मानवेंद्र राजधानी में ही अपनी भाभी के साथ रहता है। वह आशीष के घर आया और भाभी के कमांड अस्पताल में भर्ती होने की बात कहकर उसे साथ ले गया। पर अगले दिन उसका शव पाया गया।

परिवारीजनों का कहना है कि अगर आशीष मानवेंद्र के घर गया था तो वह रायबरेली कैसे पहुंचा? अगर यह मान भी लिया जाए कि आशीष व मानवेंद्र मोटर साइकिल से रायबरेली चले गए थे तो मानवेंद्र का सिर्फ एक हाथ टूटा और उसे कोई गंभीर चोट नहीं लगी थी।

उसने आशीष को आग से बचाने की कोशिश क्यों नहीं की? अगर मानवेंद्र ने हादसे की जानकारी अपने घर वालों को दी तो उसने आशीष के परिवारीजनों को फोन क्यों नहीं किया?

ऐसे तमाम सवाल हैं जिनसे अंदेशा होता है कि साजिश के तहत आशीष को लखनऊ से रायबरेली लाया गया और वहां उसकी हत्या कर दी गई।

इन्हीं तमाम सवालों का हवाला देते हुए आशीष के पिता ने हरचंदपुर पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। आशीष के परिवार के सदस्यों ने राज्यपाल, सीएम और डीजीपी को प्रार्थनापत्र देकर मानवेंद्र व उसके साथी रायबरेली के रफीनगर निवासी राजवीर सिंह और रेडियंस वेब टेक के एमडी आदिल खां को पकड़कर सख्ती से पूछताछ करने, पुलिस की भूमिका की जांच समेत अन्य मांग की थी।
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सीओ महराजगंज का कहना है कि एसटीएफ के एसपी और विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ के डायरेक्टर की अगुवाई में टीम आई थी, जो जांच के बाद वापस लौट गई।
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