रायबरेली। ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों की शिकायतों की जांचों को जिले के 15 अधिकारियों ने दबा दिया है। कई अधिकारियों ने तो एक साल बाद भी जांच पूरी नहीं की है।
मामले का संज्ञान लेते हुए डीएम नेहा शर्मा ने संबंधित जांच अधिकारियों को संबंधित 72 शिकायतों की जांच रिपोर्ट सात दिन में देने के आदेश दिए हैं। ऐसा न करने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी है। डीएम के गंभीर होने के बाद जिले के लापरवाह अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों में मनमानी की शिकायत डीएम के स्तर पर होने के बाद जांच टीमें बनाकर अधिकारियों को जांचें सौपी गई। जिला स्तरीय अधिकारियों ने 72 ग्राम पंचायतों की जांचों को अब तक पूरा नहीं किया है।
डीएम नेहा शर्मा ने शिकायतों की समीक्षा की तो मनमानी पकड़ में आई। शारदा नहर खंड दक्षिणी के अधिशासी अभियंता ने जरियारी, अयासपुर डीही, कनौली, बेलागुसीसी, झकरासी, गोदवारा, रघनाथपुर कटैली आदि गांवों की जांच दबाए हैं। सहायक निबंधक सहकारिता ने रंजीतपुर लोनारी, बसंपुर कोठइया, कूढ़ाचक, पखरौली, नरेंद्रपुर, मीरमिराजपुर आदि गांवों की जांच पूरी नहीं की।
इसके अलावा मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने मोहगवां, शोभापुर, चिलौला, रजौली, सैंबसी, हरीपुर, मलपुरा, उत्तरागौरी की जांच पूरी नहीं की है। जिला गन्ना अधिकारी ने कोडरा, गहरौली, बरवलिया, दूलापुर, रालपुर, जल निगम के अधिशासी अभियंता ने बीजूमऊ, देवगांव, सातनपुर, गोनामऊ आदि गांवों की शिकायतों को पूरा नहीं किया है।
इसके अलावा एई लघु सिंचाई, आचार्य क्षेत्रीय ग्राम विकास संस्थान, जिला कृषि अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी आदि अधिकारियों ने भी अब तक जांच पूरी नहीं की है। मामले में डीएम ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस देकर सात दिन में शिकायतों का निस्तारण करके जवाब देेने के आदेश दिए हैं। ऐसा न करने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
ग्राम पंचायतों में कराए गए कार्यों के खिलाफ शिकायतों की जांच रिपोर्ट न मिलने के कारण आगे की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। 72 शिकायतों के संबंध में डीएम ने संबंधित जांच अधिकारियों को चेतावनी देकर सात दिन में जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।
उपेंद्रराज सिंह, जिला पंचायतराज अधिकारी