औषधीय पौधों की खेती पर बढ़े किसानों का रुझान
रायबरेली। जिला उद्यान विभाग परिसर में दो दिवसीय औद्यानिक विकास किसान मेला व संगोष्ठी में किसानों को उन्नति खेती और बागवानी के टिप्स दिए गए। बछरावां विधायक रामनरेश रावत, सीडीओ राकेश कुमार ने कार्यक्रम की शुरूआत की।
विधायक ने कहा कि औद्यानिक उत्पाद फल, शाकभाजी, सब्जी और पुष्प आदि प्रकृति का अद्भुत वरदान और मानव जीवन का अभिन्न अंग है। औद्यानिक उत्पादों का जिले में असीम संभावनाएं है। किसान औद्यानिक खेती के साथ ही कृषि विविधिकरण खेती पर जोर दें।
कार्यक्रम में सीडीओ ने सतावर, गिलई, सफेद मूसली आदि के पौधों व जड़ों को किसानों को दिखाते हुए कहा कि ये पौधे देखने में छोटे लगते हैं, लेकिन यह सब औषधीय पौधे हैं। जो विभिन्न बीमारियों को दूर करने की क्षमता रखते हैं।
इनकी बीमार व्यक्तियों के इलाज करने के साथ ही मेडिकल बाजार में भी इनकी मांग है। किसान कृषि विविधिकरण के माध्यम से कृषि विकास व किसान अपना विकास कर आसानी से करके देश व समाज को उन्नति के रास्ते पर ले जा सकता है।
उद्यान विकास कृषि सेक्टर से जुड़ा एक विभाग है, जहां से खेती के बारे में जानकार हम विकास कर सकते है। उन्होंने पौधरोपण कराने पर भी जोर दिया।
वैज्ञानिक डॉ. एके सिंह व डॉ. आरके कनौजिया ने कहा कि किसान बैंगन, अमरूद, आंवला, आम सहित छायादार फलदार पौधों के रोपण के साथ ही फूलों की खेती पर भी ध्यान दें।
आधुनिक युग में फूलों की खेती गुलाब, गेंदा, कमल, रात की रानी आदि का भी महत्व बढ़ा है। उप निदेशक कृषि महेंद्र, जिला कृषि अधिकारी रवि चंद्र प्रकाश ने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए। अधिकारियों ने काउंटरों पर पहुंचकर किसानों के उत्पादों को भी देखा।