पूजा अर्चना करते शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। संवाद
सलोन। जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बृहस्पतिवार रात राजापुर चक बीवी स्थित एक मैरिज लॉन में आगमन हुआ। उन्होंने अपने प्रवचन में गोसेवा को मानव जीवन का परम कर्तव्य बताया। इसे आध्यात्मिक उद्देश्य भी करार दिया।
शंकराचार्य ने कहा कि गाय से ही पूरी सृष्टि की रचना हुई है। ईश्वर ने 84 लाख योनियों में मनुष्य को ही मानव तन दिया है। सभी मनुष्यों को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि मानव तन मिला है तो अपनी जिम्मेदारियों को समझना आवश्यक है। चाहे माता, पिता, भाई, बहन, पति या किसी भी सामाजिक पद पर हों, उसका ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि हमेशा अध्यात्म से जुड़े रहना महत्वपूर्ण है। शंकराचार्य ने मुख्य बात यह बताई कि उनका 81 दिन का व्रत चल रहा है। इस व्रत के दौरान वे सनातन धर्म का प्रचार करेंगे।
शंकराचार्य ने कहा कि वे 403 विधानसभा क्षेत्रों में जाकर सनातन धर्म का प्रचार करेंगे। उन्होंने गाय को राष्ट्र माता घोषित करवाने का निरंतर प्रयास करने की बात कही। रात्रि विश्राम उन्होंने यहीं किया और शुक्रवार सुबह भक्तों को दर्शन देने के बाद आगे की यात्रा पर निकल पड़े। इस अवसर पर अजय विश्वकर्मा, अनिल त्रिपाठी समेत सैकड़ों भक्त उपस्थित रहे।