मानसून में दो लाख पौधे रोपित करने का लक्ष्य रखा गया है। पर अब तक यहां पौधे रोपित करने की तैयारियां रामभरोसे हैं। यही वजह है कि पौधे कहां पर रोपित किए जाने हैं, इसका स्थान तय नहीं हो पाया है। इस बार जिले में नौ लाख 20 हजार पौधे रोपित करने का लक्ष्य रखा गया था।
विभाग का दावा है कि नौ लाख 20 हजार पौधे रोपित करने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। अब उच्चाधिकारियों ने दो लाख पौधे रोपित करने का लक्ष्य और दे दिया है। इस तरह 11 लाख 20 हजार पौधे रोपित करने का कुल लक्ष्य मिल गया है।
दो लाख पौधे रोपित करने का लक्ष्य तो बढ़ा दिया गया है, लेकिन विभाग के अफसर ये नहीं तय कर पाए हैं कि पौधे किस स्थान पर रोपित किए जाएं। अफसर यही दावा कर रहे हैं कि पौधे रोपित करने की तैयारी की जा रही है। जल्द जो लक्ष्य बढ़ाया गया, उतने पौधे रोपित करा दिए जाएंगे। पिछले साल पांच लाख पौधे जिले में रोपित किए गए थे।
विभाग की तरफ से हर साल भारी तादाद में पौधे रोपित करने का दावा तो किया जाता है। लेकिन देखभाल के अभाव में जिले को हरा भरा बनाने का सपना हकीकत में नहीं बदल पाया है। वजह सिंचाई के अभाव में पौधे सूख रहे हैं।
यही नहीं ट्री-गार्ड बनाने में भी मनमानी की जा रही है। इससे पशु रोपित किए गए पौधों को चट कर जाते हैं। इस लापरवाही से 20 फीसदी से अधिक पौधे सूख गए हैं या फिर उन्हें पशुओं ने चट कर दिया है।
जिले में वन विभाग की 17 नर्सरी हैं। जिनमें पौधे तैयार किए जाते हैं। अफसरों का दावा है कि इन नर्सरियों में 17 हजार पौधे तैयार किए गए हैं। इसमें आम, अमरूद समेत अन्य पौधे शामिल हैं। इन नर्सरियों में तैयार किए गए पौधे रोपित किए गए जाते हैं।
वन विभाग के एसडीओ उमाशंकर दोहरे ने बताया कि वन विभाग ने दो लाख पौैधे रोपित करने का लक्ष्य और बढ़ा दिया है। अब तक जिले में नौ लाख 20 हजार पौधे रोपित किए जा चुके हैं।
जगह का चयन करके जल्द पौधे रोपित का कार्य शुरू करा दिया जाएगा। जो पौधे रोपित किए जाते हैं, उनकी देखभाल के लिए वन कर्मियों को निर्देशित किया गया है। ट्रीगार्ड बनवाकर पौधों की सुरक्षा की जाती है।