रायबरेली। रेलवे ट्रैक पर स्लीपर रखकर ट्रेन पलटाने की साजिश के मामले की जांच एक हफ्ते बाद भी बेनतीजा है। अब तक घटनास्थल और उसके आसपास के कई गांवों में जांच की गई, लेकिन कोई पुख्ता सुराग हाथ नहीं लगा है। ग्रामीण भी पूछताछ में कुछ बोलने की तैयार नहीं हैं। नवाबगंज पुलिस घटना की जांच कर रही है। प्रतापगढ़ की सर्विलांस टीम और एसओजी का भी सहयोग लिया जा रहा है। अब उन मोबाइल नंबरों की खोज कराने की रूपरेखा बनाई है, जो वारदात के समय घटनास्थल के आसपास थे।
प्रतापगढ़ के परियावां और रायबरेली के अरखा स्टेशन के बीच गौरी गांव में 16 सितंबर की रात ट्रैक पर स्लीपर रख दिया गया था, जिससे प्रयागराज से सहारनपुर जाने वाली नौचंदी एक्सप्रेस टकरा गई थी। गनीमत रही कि बड़ा हादसा नहीं हुआ। घटनास्थल फाफामऊ-ऊंचाहार रेलमार्ग पर प्रतापगढ़ जिले के अंतर्गत आता है। इसीलिए एफआईआर नवाबगंज थाने में दर्ज कराई गई थी। घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं, इसके बारे में जानने के लिए रेलवे के मंडलीय अधिकारियों के साथ सीआईडी टीम भी छानबीन कर चुकी है। नवावगंज थाने के साथ आरपीएफ और जीआरपी भी अपने स्तर पर पड़ताल कर रही हैं, फिर कोई सुराग हाथ नहीं लग सका है।
नवाबगंज पुलिस ने गौरी गांव के अलावा आसपास के कई गांवों में जाकर उन असामाजिक तत्वों के बारे में पूछताछ की, जिन्होंने ट्रैक पर स्लीपर रखा है। उन लोगों के बारे में भी जानने का प्रयास किया, जो अक्सर घटनास्थल पर आते-जाते रहते हैं। नवाबगंज थाना प्रभारी संतोष सिंह का कहना है कि ग्रामीणों की ओर से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। वारदात के समय घटनास्थल के आसपास कितने नंबर सक्रिय थे, उनके बारे में खोज कराई जा रही है। इससे जांच में मदद मिलेगी। पुलिस अधीक्षक (रेलवे) रोहित मिश्र का कहना है कि टीमें घटना के खुलासे के लिए लगातार प्रयास कर रही है।