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जांच में सामुदायिक शौचालय मिले बंद, 108 समूहों से मांगा जवाब

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रायबरेली। ग्राम पंचायत स्तर पर बनवाए गए सामुदायिक शौचालयों के ताले नहीं खुल रहे हैं। शासन की मंशा पर डीपीआरओ कार्यालय स्थित वाररूम से फोन करके जांच की गई तो कहीं फोन बंद मिले तो कहीं बिजली नहीं मिली। 80 से अधिक महिला स्वयं समूह काम करते नहीं मिले। कई गांवों में सामुदायिक शौचालयों का काम पूरा नहीं हुआ है, लेकिन समूहों को काम दे दिया गया है। मनमानी पकड़ में आने के बाद 108 महिला स्वयं सहायता समूहों से जवाब मांगा गया है। साथ ही सभी 18 ब्लॉकों के एडीओ (पंचायत) को भी कारण बताओ नोटिस देकर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में सामुदायिक शौचालय बनवाए गए हैं। इनके रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वय सहायता समूहों को दी गई है। इसके एवज में समूहों को प्रति माह नौ हजार रुपये दिए जाते हैं। इसमें छह हजार मानदेय और तीन हजार रुपये सामुदायिक शौचालयों के लिए सामान खरीद के लिए दिए जाते हैं। शुरू से ही सामुदायिक शौचालयों में ताले लटके होने के कारण वर्तमान समय में समूहों को भुगतान नहीं मिल पा रहा है। हालांकि शासन स्तर से समूहों को फोन करके इन शौचालयों के संचालन के संबंध में जानकारी ली जाती है।
डीपीआरओ ने जिले स्तर पर स्थापित वार रूम से भी सामुदायिक शौचालयों के संचालन के संबंध में जांच शुरू की गई है। सोमवार को 108 समूहों को फोन करके शौचालयों के संचालन के बारे में जानकारी ली गई तो कहीं भी शुचारु रूप से सामुदायिक शौचालयों का संचालन नहीं मिला। मामले में डीपीआरओ ने समूहों से जवाब-तलब किया है। सभी एडीओ को भी नोटिस देकर सामुदायिक शौचालयों में ताले लटके होने के संबंध में जवाब मांगा है।
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सामुदायिक शौचालय बना नहीं, समूह को दे दिया काम
जगतपुर ब्लॉक के मनिहरशर्की की फूलमती महिला स्व्यं सहायता समूह को वार रूम से फोन किया तो पता चला कि अब तक सामुदायिक शौचालय के निर्माण नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में काम कैसे किया जाएगा। जांच में अमावां में हरदासपुर, छतोह में कांता, कपूरपुर, काजीपुर तेलियानी में ताला लटका मिला। गौरा ब्लॉक के झरहा में मोटर चोरी होने से काम ठप मिला। दतौली, मनोहरगंज, नवाबगंज, इस्माइलमऊ, सरेनी, इटौरा, जरिया आदि में भी सामुदायिक शौचालयों का संचालन ठीक नहीं मिला।
सामुदायिक शौचालयों के संचालन और रखरखाव की जांच शुरू कराई गई है। पहले दिन 108 समूहों को फोन किया गया। खामियां मिलने पर समूहों से जवाब मांगने के साथ ही एडीओ को भी नोटिस देकर सामुदायिक शौचालयों के संचालन के आदेश दिए गए हैं।
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उमाशंकर मिश्रा, डीपीआरओ
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