रायबरेली। जिला अस्पताल में छह माह से बेकार पडे़ ऑक्सीजन प्लांट को शुरू कराने में नाकाम सीएमएस ने कार्यदायी संस्था पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ा है। डीएम को भेजे जवाब में कहा-वित्तीय अनियमितता को रोकने के लिए शासन को बजट लौटाया गया।
हालांकि शासन से मिले 11 लाख रुपये को चार माह तक दबाए रखा गया। प्लांट को ठीक न कराए जाने से सांस की समस्या के मरीजों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को प्राणवायु मिलने में समस्या हो रही है।
जिला अस्पताल ऑक्सीजन प्लांट का कंप्रेशर खराब हो जाने से सितंबर 2025 से प्राणवायु का उत्पादन ठप है। अस्पताल के 300 बेडों पर ऑक्सीजन की सीधी आपूर्ति बंद है। शासन ने दिसंबर 2025 में जिला अस्पताल को 11 लाख रुपये देकर प्लांट को ठीक कराने के निर्देश दिए।
सीएमएस पुष्पेंद्र कुमार ने 16 जनवरी 2026 को कार्यदायी संस्था साइरेक्स को प्लांट को ठीक कराने के लिए पत्र भेजा। साइरेक्स ने काम शुरू नहीं किया। दोबारा सीएमएस ने संस्था को पत्र भी नहीं लिखा। बीती 28 मार्च को औपचारिकता निभाते हुए पत्र लिखने के साथ ही 31 मार्च तक बजट को वापस कर दिया। खास बात यह कि चार माह तक बजट रखने के बाद भी अधिकारियों ने कार्यदायी संस्था पर दबाव बनाकर काम को पूरा कराने में लापरवाही बरती।
माई सिटी में खबर प्रकाशित होने के बाद डीएम ने जिला अस्पताल के सीएमएस से जवाब मांगा। सीएमएस ने जवाब में अपनी सुस्ती और लापरवाही को छुपा लिया। डीएम को भेजे जवाब में लिखा कि कार्यदायी संस्था को ऑक्सीजन प्लांट ठीक कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन संस्था ने काम को पूरा नहीं कराया। हैरत की बात है कि कार्यदायी विभाग ने चार माह में काम नहीं कराया तो भी उसके खिलाफ लिखापढ़ी तक नहीं की गई, जबकि अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इसके बाद भी लापरवाही बरती गई।
सीएमएस का कहना है कि डीएम को जवाब भेज दिया गया है। कार्यदायी संस्था ने समय से काम को पूरा नहीं कराया। किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता को रोकने के लिए बजट को वापस कर दिया गया।