बछरावां कस्बा स्थित गोदाम के बाहर खाली सिलिंडर लेकर सुबह से लाइन में खड़े उपभोक्ता।
रायबरेली। जिला प्रशासन और जिला पूर्ति विभाग भले ही रसोई गैस की किल्लत न होने का दावा करे, लेकिन जिले की 56 गैस एजेंसियों में गैस सिलिंडर का भारी टोटा है। व्यावसायिक गैस सिलिंडर न मिलने के कारण होटल संचालक भट्ठी के जरिये काम चला रहे हैं। ज्यादातर गैस एजेंसियों के गोदाम बंद हैं, जबकि कार्यालयों में केवाईसी कराने का कार्य हो रहा है।
खास बात ये है कि चूल्हा चौका छोड़कर महिलाएं भी गैस सिलिंडर और केवाईसी कराने को लेकर गैस एजेंसियों में पहुंच रही हैं। सिलिंडर की दिनोंदिन हो रही कमी लोगों पर भारी पड़ रही है। गैस सिलिंडर पाने के लिए एजेंसियों में बुकिंग तेजी से हो रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत घरेलू गैस सिलिंडर को लेकर हो रही है। शहर से लेकर कस्बों की एजेंसियों में सुबह से ही लोग सिलिंडर पाने की चाहत में पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगती है।
ढाबा संचालकों का कारोबार प्रभावित
बछरावां। रसोई गैस की किल्लत के कारण होटल और ढाबा संचालकों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। ढाबा संचालक अब लोहे के ड्रम काटकर भट्टी बना रहे हैं। इसी भट्टी पर भोजन पकाकर ग्राहकों को परोसा जा रहा है। गैस सिलिंडर की बुकिंग और वितरण में लगातार लंबी लाइनें लग रही हैं। लोगों के घरों के एलपीजी गैस सिलिंडर भी खाली हो गए हैं।
ग्रामीण मनोज रामभजन ने बताया कि वे बीते एक सप्ताह से गैस सिलिंडर के लिए घूम रहे हैं। उन्हें रसोई गैस नहीं मिल पा रही है। लोग सुबह तीन बजे से चार बजे तक सिलिंडर लेने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। ढाबा संचालक सुरेश और अंकित कुमार का कहना है कि गैस सिलिंडर न मिलने से व्यापार चौपट हो रहा है। लोहे के ड्रम काटकर चूल्हा बनाया है।
यदि जल्द गैस सिलिंडर न मिले तो लकड़ी भी महंगी हो जाएगी। इस स्थिति में उन्हें मजबूरन खाने के दाम बढ़ाने पड़ेंगे। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना होगा।