लालगंज (रायबरेली)। विकास क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के शत-प्रतिशत बच्चों को किताबें नहीं मिल पाई हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
दूसरी तरफ यूनिफार्म, जूता-मोजा, स्कूल बैग आदि के लिए प्रत्येक बच्चे को 1200 रुपये दिए जाते हैं, लेकिन अब तक किसी भी बच्चे को लाभ नहीं मिला है। ऐसे में बच्चे पुरानी ड्रेस में स्कूल पहुंच रहे हैं। बच्चों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत धनराशि भेजी जाती है, जिसके लिए प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है।
लालगंज विकास क्षेत्र में कुल 149 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 122 प्राथमिक, 16 उच्च प्राथमिक और 11 कंपोजिट स्कूल शामिल हैं। प्रेरणा पोर्टल पर इन स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 6883 दर्ज है। ब्लाक संसाधन केंद्र का दावा है कि 90 प्रतिशत पुस्तकों का वितरण कराया जा चुका है। कक्षा पांच की तीन विषयों की पुस्तकें अब तक नहीं मिल सकी हैं। डीबीटी प्रक्रिया के तहत विद्यालयों से बच्चों का डाटा प्रमाणित होकर आ रहा है, जिसे ब्लाक संसाधन केंद्र से सत्यापित कर जिला मुख्यालय भेजा जा रहा है। इसके बावजूद अब तक किसी भी बच्चे को लाभ नहीं मिल सका है।
खंड शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार ओझा ने बताया कि बीआरसी को मिली सारी किताबें विद्यालयों तक पहुंचाई जा चुकी हैं। डीबीटी के तहत भी 60 फीसदी बच्चों का डाटा जिला मुख्यालय अग्रसारित कर दिया गया है।
कक्षा दो के बच्चों को नहीं मिली हैं आर्ट की किताबें
ऊंचाहार। विकास क्षेत्र के 99 प्राथमिक, 18 पूर्व माध्यमिक विद्यालय और नौ कंपोजिट विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की संख्या 8334 हैं। विभाग का दावा है कि सभी विद्यालयों तक किताबें पहुंचा दी गई हैं, लेकिन हकीकत में कक्षा एक और कक्षा पांच के बच्चों को मैथ वर्क बुक नहीं मिली है। अंग्रेजी माध्यम से संचालित 14 प्राथमिक स्कूलों में कक्षा दो के बच्चों को आर्ट की किताब नहीं उपलब्ध कराई गई है। जिला मुख्यालय से कक्षा दो की जगह कक्षा एक की आर्ट की किताब भेज दी गई है। जिसे वापस भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
दूसरी तरफ किसी भी बच्चे को ड्रेस, जूता-मोजा, स्कूल बैग आदि के लिए धनराशि नहीं मिली है। डीबीटी के तहत लगभग छह हजार बच्चों डाटा तैयार किया गया है। खंड शिक्षा अधिकारी ऋचा सिंह ने बताया कि सभी स्कूलों में किताबें पहुंच गई हैं। डीबीटी की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी कराई जा रही है। (संवाद)
बच्चों को मिली हैं अधूरी किताबें, कैसे करें पढ़ाई
सतांव। विकास क्षेत्र के 123 परीषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक में लगभग 11670 बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें अधूरी किताबें मिली हैं। यानी कि सभी विषयों की किताबें अभी तक उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। नया शैक्षिक सत्र शुरू हुए एक महीने से ज्यादा समय बीत गया है, लेकिन किताबों के अभाव में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि पुस्तक वितरण में ढिलाई बरती जा रही है, जिसकी वजह से अभी तक लगभग 25 प्रतिशत किताबें बच्चों को मिल सकी हैं। डीबीटी प्रक्रिया को लेकर ब्लाक संसाधन केंद्र के पास कोई आंकड़े नहीं है। खंड शिक्षा अधिकारी शीतल श्रीवास्तव ने बताया कि किताबें स्कूलों में भेजी जा रही हैं। जल्दी ही सभी बच्चे लाभान्वित हो जाएंगे। डीबीटी के बारे में बीईओ ने बताया कि रिपोर्ट मंगाई जा रही है। (संवाद)