जननी सुरक्षा योजना का लाभ पा चुकी महिलाओं के बयान दर्ज किए। कई ऐसे भी केस मिले, जिसमें लाभार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिला था।
जांच के दौरान सीएचसी पर हड़कंप की स्थिति रही। सीबीआई इंस्पेक्टर सबीना खातून सिद्दीकी व प्रेम नारायण की टीम बुधवार सुबह सबसे पहले सीएचसी अमावां पहुंची।
अप्रैल 2007 से वर्ष 2011 तक के कार्यों के दस्तावेजों को खंगाला। नसबंदी, जननी सुरक्षा योजना के लाभार्थियों व आशा बहुओं के बयान दर्ज किए।
उनसे भुगतान मिलने के संबंध में जानकारी ली। जांच में सीबीआई टीम ने जो सूची चिह्नित की थी, उसमे एक नाम जनवरी 2007 का निकला।
परिगवां निवासी रामलली ने सहायता राशि न मिलने का आरोप लगाया। सीबीआई टीम ने आशा बहू से पूछताछ की तो पता चला कि रामलली का प्रसव 30 मार्च को हुआ था।
इसलिए लाभ नही मिल पाया, क्योंकि एनआरएचएम अप्रैल 2007 से जिले में लागू हुई थी। इसके बाद टीम ने महराजगंज सीएचसी पहुंचकर एनआरएचएम के दस्तावेजों को खंगाला।
जननी सुरक्षा योजना, नसबंदी व अन्य योजनाओं के लाभार्थियों को सीएचसी पर बुलाकर उनके बयान लिए। योजना का लाभ मिलने के संबंध में जानकारी ली।
एक-एक करके लाभार्थियों से पूरी जानकारी ली। सीएचसी महराजगंज के अधीक्षक डॉ. शरद कुशवाहा व अन्य स्टाफ ने टीम द्वारा मांगे गए दस्तावेजों को उपलब्ध कराया।