एक माह में बीएसए ने 70 से अधिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को जांचा। इसमें 60 से अधिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता खराब मिली। शिक्षक तो स्कूलों में मिले, लेकिन बच्चे हिंदी-अंग्रेजी तक नहीं पढ़ पाए।
मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए बीएसए ने सभी 19 खंड शिक्षा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बीएसए ने बीईओ से पूछा है कि टीचर स्कूल जाते हैं, लेकिन बच्चों को पढ़ाते क्यों नहीं।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के साथ ही जवाब देने के आदेश दिए हैं। एक महीने में बीएसए ने जिस भी स्कूल का निरीक्षण किया, वहां बच्चे कुछ नहीं पढ़ पाए।
बीएसए को पूर्व माध्यमिक कन्या स्कूल हलोर व कुछ और स्कूलों में ही शिक्षा की गुणवत्ता ठीक मिली। अन्य स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बेहद खराब मिला। बीएसए के सवालों का जवाब बच्चे नहीं दे पाए।
शिक्षकों को अल्टीमेटम भी दिया। लेकिन खंड शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही के कारण पढ़ाई में सुधार नहीं आ पा रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए बीएसए ने शनिवार को नगर, राही, बछरावां, हरचंदपुर, जगतपुर, महराजगंज, शिवगढ़, डलमऊ, खीरों, जगतपुर, ऊंचाहार, सलोन सहित सभी ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने का आदेश दिया है।
बीईओ को निर्देशित किया गया है कि वे भी स्कूलों में पहुंचकर पढ़ाएं और शिक्षकों को पढ़ाने का तरीका बताएं। बीएसए
रामसागर पति त्रिपाठी ने बताया कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने में खंड शिक्षा अधिकारी लापरवाही कर रहे हैं।
स्कूलों में बच्चे हिंदी तक की किताब नहीं पढ़ पा रहे हैं। सभी बीईओ को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाया जाएगा।