डलमऊ (रायबरेली)। गंगा तट पर करीब 60 लाख रुपये की लागत से दो माह पहले ही बनकर तैयार हुए पुल में दरार आ गई। पुल का अभी तक लोकार्पण भी नहीं हुआ है।
इससे लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं की मनमानी उजागर हो गई है। पुल में दरार की सूचना पर विभागीय अभियंताओं में हड़कंप मच गया है। लोगों ने जिलाधिकारी से पुल निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराए जाने की मांग की है।
डलमऊ गंगा तट पर सड़क घाट और वीआईपी घाट के बीच नाला बहता है। यहां पर श्रद्धालुओं को आने-जाने के लिए अस्थाई पुल बना था। कार्तिक पूर्णिमा में यहां भारी भीड़ उमड़ती है। अन्य दिनों में भी भीड़भाड़ रहती है।
दोनों घाटों के बीच आने-जाने में सहूलियत के लिए पुल का निर्माण कराया गया। दो महीने पहले ही पुल बनकर तैयार हुआ था। अभी तक लोकार्पण भी नहीं हुआ है।
इसके पहले बीच पुल में दरार आ गई। रेलिंग में भी दरार दिख रही है। रोहित कुमार, सुधीर जायसवाल, अजय कुमार, अर्षित तिवारी, विमलेश ने बताया कि पुल के निर्माण में लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं और काम कराने वाले ठेकेदार ने जमकर मनमानी की।
60 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन पुल की गुणवत्ता बेहद खराब है। यहां पर हर पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। कभी भी पुल टूट सकता है। नागरिकों ने बताया कि निर्माण के दौरान पुल में जमकर मनमानी की गई। यही वजह है कि इतनी जल्दी पुल में दरार आ गई।
उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता संतोष कुमार राय ने बताया कि पुल में दरार नहीं आई है। बीच में एक्सपेंशन ज्वाइंट है। ज्वाइंट की जगह पर बीच में जगह छोड़नी थी, लेकिन उसमें मसाला डाल दिया गया है। मसाले को हटवाकर ज्वाइंट में जगह बनाई जाएगी। निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की गई है।