वहीं सोमवार रात दो कच्ची कोठरी ढह गईं। खेतों में पानी भरने से करीब 500 बीघा धान की फसल जलमग्न है। लगातार पानी घरों की ओर बढ़ रहा है।
इससे ग्रामीण दहशत में हैं। लोगों का कहना है कि इसकी शिकायत की गई, लेकिन अभी तक कटान को नहीं बंधवाया गया। उधर विभागीय अधिकारी चुनाव में व्यस्त होने का हवाला दे रहे हैं।
बेलापोषक नहर से निकली कितूली माइनर एक सप्ताह पहले जहनामऊ गांव के पास कट गई थी। लगातार पानी के बहाव से कटान और तेज हो गई। गांव की सड़कों पर पानी भर गया है।
गांव के किनारे रह रहे कल्लू और गज्जू की कच्ची कोठरी ढह गई। गांव के ही संजय ने तालाब में मछली पालन के लिए पट्टा लिया है।
तालाब में पानी भरने से एक लाख रुपये कीमत की मछलियां पानी के साथ बह गई। ग्रामीण राजेश कुमार, रामआसरे, बृजलाल, अमृत आदि ने बताया कि माइनर कटने की शिकायत सिंचाई विभाग के अधिकारियों से की गई थी। लेकिन अभी तक माइनर को बंधवाया नहीं गया है। बताया कि 500 बीघा धान की फसल में पानी में डूब गई है।
सिंचाई विभाग खंड दक्षिणी के जेई राजपाल ने बताया कि किसानों ने सिंचाई के लिए नहर में कटिंग की थी। शिकायत मिली हैं। पंचायत चुनाव में व्यस्तता होने के कारण अभी माइनर नहीं बंधवाई गई है। जल्द ही कटान को बंधवाया जाएगा।