रायबरेली। दिवाली पर प्रदूषण रोकने के लिए लोगों में अब जागरूकता दिखने लगी है। यही वजह है कि इस बार दिवाली पर कम पटाखे छुड़ाए गए। इससे वायु प्रदूषण तो कम रहा लेकिन ध्वनि प्रदूषण पिछले साल की तुलना में बढ़ा हुआ दर्ज किया गया। त्योहार को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने तीन सेंटरों से मॉनिटरिंग की।
दीपावली पर इस बार प्रशासन ने तेज आवाज और ज्यादा प्रदूषण करने वाले पटाखों पर रोक लगाई थी। इसके स्थान पर ग्रीन पटाखों की अनुमति दी गई थी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से आवासीय क्षेत्र में इंदिरा नगर, कामर्शियल क्षेत्र के लिए खोया मंडी और इंडस्ट्रियल एरिया के अमावां रोड पर वायु प्रदूषण मापने के लिए परिवेशीय वायु गुणवत्ता जांच सेंटर बनाया था।
इन सेंटरों से वायु प्रदूषण पर नजर रखी गई। इसी तरह ध्वनि प्रदूषण के लिए टीम गठित की गई, जो शहर के विभिन्न मोहल्लों में जाकर डिवाइस से ध्वनि का आंकलन किया।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि दीपावली को वायु प्रदूषण बढ़ा था, जो आम दिनों की अपेक्षा 102 एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) से बढ़कर 143 एक्यूआई हो गया।
इसी तरह ध्वनि प्रदूषण 50.5 से बढ़कर 62 डेसिबल हो गया। यह दोनों आंकड़े 29 अक्तूबर से चार नवंबर के बीच के हैं। प्रदूषण नियंत्रण के अधिकारियों के अनुसार इस बार कम पटाखे फोड़ जाने से वायु प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई।
पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा रहा ध्वनि प्रदूषण
प्रदूषण के प्रति लोग जागरूक हो रहे हैं। जिससे पिछले तीन सालों से प्रदूषण के आंकड़ों में गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार ध्वनि प्रदूषण ज्यादा रहा। वहीं वायु प्रदूषण में गिरावट दर्ज हुई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में वायु प्रदूषण 259 एक्यूआई दर्ज किया गया, जो तीन सालों में सबसे अधिक हैं। इसी तरह वर्ष 2019 में यह आंकड़ा घटकर 194 एक्यूआई रहा।
2020 में यह आंकड़ा 155 एक्यूआई तक पहुंचा। इसी तरह वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 143 एक्यूआई तक पहुंचा। इसी तरह 2018 मे ध्वनि प्रदूषण 79 डेसिबल रहा, जबकि 2019 में 63 डेसिबल तक पहुंचा। 2020 में ध्वनि प्रदूषण 60.20 डेसिबिल रहा। इस बार ध्वनि प्रदूषण बढ़कर 62 डेसिबल रहा।
दिवाली पर इस साल कम आतिशबाजी हुई है। लोग जागरूक रहे और कम पटाखे दगाए। इसी का नतीजा है कि प्रदूषण कम हुआ। जिस तरह लोगों में जागरूकता दिख रही है, उससे आने वाले समय में दिवाली पर प्रदूषण और कम होने की संभावना है।
- प्रदीप कुमार विश्वकर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड