रायबरेली। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को रेबीज के संक्रमण से बचाने के पूरे बंदोबस्त होने के बाद भी एक युवक एंटी रेबीज वेनम (एआरवी) लगवाने से चूक गया। करीब चार माह पहले चपेट में आने के बाद युवक में हाइड्रोफोबिया के लक्षण दिखे हैं। शुक्रवार को मेडिसिन विभाग में चिकित्सक डॉ. गौरव त्रिवेदी की ओपीडी में आए मरीज को हालत नाजुक होने के कारण मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया गया।
लालगंज क्षेत्र के उमरामऊ निवासी भानू (32) में हाइड्रोफोबिया के लक्षण दिखे हैं। डॉ. गौरव त्रिवेदी का कहना है कि भानू चार माह पहले चपेट में आया था। परिवार के लोगों के अनुसार गाय को कुत्ते ने काटा था। गाय के सहारे बछड़ा संक्रमित हो गया था। बछड़े से युवक चपेट में आया। बछड़े की मौत हो गई है।
बताया कि चार माह बाद भानू में रेबीज के संक्रमण के लक्षण दिखे। डॉ. त्रिवेदी ने बताया कि मरीज में हाइड्रोफोबिया के लक्षण मिलने पर उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया है। रेबीज के संक्रमण के फैलने के बाद जिला स्तर पर इलाज के समुचित बंदोबस्त नहीं हैं, इसलिए कुत्ते के काटने या चपेट में आने के बाद एआरवी जरूर लगवाएं। इसमें कतई लापरवाही न बरतें।