रायबरेली। रोक के बावजूद शस्त्र लाइसेंस स्वीकृत करवा लेने का खुलासा दो साल बाद हुआ है। कलेक्ट्रेट में तैनात रहे लिपिक अमिय कृष्ण शुक्ला ने मनमाने तरीके से लाइसेंस स्वीकृत करवा लिया था।
डीएम नेहा शर्मा ने मामले को पकड़ने के बाद लिपिक के खिलाफ आरोपपत्र जारी कर दिया है। साथ ही लाइसेंस की स्वीकृति निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कारनामा पकड़ में आने के बाद कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों में हड़कंप मचा है।
वर्ष 2017 में कलेक्ट्रेट में तैनात लिपिक अमिय कृष्ण शुक्ला ने शहर के खाली सहाट निवासी दिलीप कुमार तिवारी के नाम शस्त्र लाइसेंस स्वीकृत करवा लिया था। खास बात यह कि वर्ष 2017 में तत्कालीन डीएम ने नया शस्त्र लाइसेंस किसी भी व्यक्ति को जारी नहीं किया था।
इसके बावजूद बिना तारीख के ही लाइसेंस स्वीकृत करवा लिया गया था जो जारी नहीं किया गया था। पिछले दिनों शस्त्र लाइसेंस के लिए दिलीप कुमार तिवारी डीएम के सामने पेश हुआ तो डीएम ने पूरी पत्रावली मंगवा कर चेक की तो परत-दर-परत लिपिक के कारनामे की कलई उजागर हो गई।
शासन से रोक और अधूरी पत्रावली के बाद भी शस्त्र लाइसेंस स्वीकृत करा लिया गया था। मामले में डीएम ने लिपिक अमिय कृष्ण शुक्ला के खिलाफ चार्जशीट जारी कर दिया है। अमिय पर पांच आरोप लगाए गए हैं। शस्त्र लाइसेंस की स्वीकृति को निरस्त करनेे की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है।
जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने बताया कि पत्रावली को देखने से स्पष्ट हो गया कि शस्त्र लिपिक रहे अमिय कृष्ण शुक्ला ने मनमाने तरीके से शस्त्र लाइसेंस स्वीकृत करवा लिया था। मामले में लिपिक की संलिप्तता मिलने पर पांच आरोप लगा कर उसके खिलाफ चार्जशीट जारी की गई है। अन्य कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है।