रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एनॉट्रिक्स-2025 का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम में एम्स के साथ ही सीतापुर, उन्नाव, लखनऊ सहित कई मेडिकल कॉलेजों के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वाद-विवाद प्रतियोगिता और मॉडल बनाने में एम्स रायबरेली का दबदबा रहा।
एम्स में एतिहासिक और अंतरमहाविद्यालयी शैक्षणिक कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम का संयोजन स्टूडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने एनाटॉमी विभाग के मार्गदर्शन में किया। एम्स रायबरेली के इतिहास में प्रथम था, जिसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लेकर इसे गौरवशाली बना दिया।
वाद-विवाद प्रतियोगिता में एम्स के निखिल को प्रथम, टीएस मिश्रा मेडिकल कॉलेज लखनऊ के अक्षिता गोयल को द्वितीय और एचआईएमएस सीतापुर के देबांग्शु कुंडू को तृतीय पुरस्कार मिला। हिस्टोलॉजी रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम स्थान आरुषि और अंकित, द्वितीय स्थान मानव, आदित्य और श्रेया और तृतीय स्थान आयुषी, यतिन और रिया ने प्राप्त किया।
मॉडल प्रतियोगिता में प्रथम स्थान एम्स के शिवम पटेल, आलोक मीणा, उज्जवल, यशस्वी जैन और अयान शकील को मिला। द्वितीय स्थान एचआईएमएस सीतापुर के रोहन, ओजस, पूर्वी, विशाखा और प्रतीक त्रिपाठी को मिला। एम्स के ही निखिल कुमार, सौभाग्य, झुम्सी, आदित्य प्रताप, सानिया और रमेश तीसरे स्थान पर रहे। सांत्वना पुरस्कार न्यासा महाजन, मान्या वशिष्ठ, अदिति चव्हाण, मृणमयी पाटिल, आस्था सिंह, कृष्णा सिंह और भानु प्रताप को दिया गया।
एनाटॉमी विभागाध्यक्ष प्रो. रजत शुभ्रदास के मार्गदर्शन में कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी दिव्यांशु मोहन आर्य, जनरल सेक्रेटरी रक्षित पारीख, पटनायक, पलाश, आर्यमान की अहम भूमिका रही।
प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देते हुए मुख्य अतिथि लेखक, शिक्षाविद एवं एनाटॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के मुख्य संपादक प्रो. विश्राम सिंह ने कहा कि इस प्रकार के अकादमिक आयोजन विद्यार्थियों की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा में मोड़ते हैं। उन्होंने छात्रों को ध्यान और आत्मचिंतन जैसे आंतरिक अनुशासन को अपनाने की सलाह दी। डीन डॉ. नीरज कुमारी ने कहा कि छात्रों के भीतर जो समर्पण, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा देखी वह एम्स रायबरेली की शैक्षणिक परंपरा को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा।