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डीएपी के बाद अब यूरिया का संकट, बेहाल साढ़े चार लाख किसान

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दो ब्लॉकों में नहीं है खाद
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ऊंचाहार। रोहनियां और ऊंचाहार ब्लॉक के किसानों को खाद-बीज व कीटनाशक उपलब्ध कराने के लिए 13 साधन सहकारी समितियां हैं। इन साधन सहकारी समितियों से यूरिया गायब है। समितियों में तालाबंदी है।
किसान समितियों में जाते हैं और वापस लौट आते हैं। क्षेत्र का लगभग 25 हजार किसान यूरिया के लिए समितियों के चक्कर काट रहे हैं। किसान मजबूरी में दुकानदारों से दोगुने रेट पर यूरिया खरीदने को मजबूर है। उधर, एडीओ सहकारिता रमेश कुमार का कहना है कि खाद की डिमांड की गई है। जल्द खाद आ जाएगी। इसके बाद वितरण कराया जाएगा।
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क्षेत्र के 30 हजार किसान परेशान
जगतपुर। क्षेत्र में करीब 30 हजार किसान खेती कर अपने परिवार की जीविका चलाते हैं। क्षेत्र की साधन सहकारी समितियों में यूरिया नहीं है। एक बोरी यूरिया पाने के लिए किसानों को भागदौड़ करनी पड़ रही है। किसान हरकेश कुमार, राजेंद्र सिंह, पितांबर पटेल, राजकुमार रामेंद्र, रामकुमार अवस्थी, सुशील द्विवेदी, आशीष, अजय पाल सिंह, सोनू सिंह, राजेश आदि का कहना है कि यूरिया नहीं मिल पा रही है।
ऊंचाहार पीसीएफ सेंटर पर खाद लाने के लिए गया था। पांच घंटे तक लाइन में लगा रहा, लेकिन खाद नहीं मिली। प्राइवेट दुकानदारों के पास भी खाद नहीं है। जगतपुर में छह सहकारी समितियां हैं। इसमें चार साधन सहकारी समितियों पर खाद की सप्लाई दी जाती। दो साधन सहकारी समिति बंद चल रही हैं। एडीओ कोऑपरेटिव रमेश चौधरी ने बताया कि समितियों पर अभी तक कुल 70 मीट्रिक टन यूरिया आ चुकी है। 156 मीट्रिक टन की डिमांड भेजी गई है। इसके बाद भी 200 मीट्रिक टन और खाद की आवश्यकता है।
खाद बिना खराब हो रही गेहूं की फसल
गदागंज। दीनशाहगौरा ब्लॉक क्षेत्र की साधन सहकारी समिति धूता, जलालपुर धई, गौरा हरदो, सुठठा पश्चिम में इस समय यूरिया नहीं है। इस समय गेहूं की फसल की सिंचाई के बाद यूरिया की जरूरत है, लेकिन समितियों से खाद गायब होने की वजह से किसान रोज समिति के चक्कर लगा रहे हैं। किसान समर सिंह, राजेश नारायण त्रिवेदी, राम सजीवन, विजय प्रताप, राम सरन ने बताया कि वह एक सप्ताह से यूरिया के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। समिति के सचिव सिर्फ जल्द खाद मिलने का आश्वासन दे रहे हैं। एडीओ कोऑपरेटिव आमोद आनंद ने बताया कि यूरिया खाद की डिमांड की गई है। जल्द ही समितियों में खाद पहुंच जाएगी।
रायबरेली। जिले में डीएपी के बाद अब यूरिया का संकट हो गया है। गेहूं की फसल की पहली सिंचाई के बाद किसान यूरिया पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है।
साधन सहकारी समितियों में तालाबंदी है। किसान समितियों से वापस लौट रहे हैं। जिले में इस बार डेढ़ लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल पर गेहूं की फसल की बोआई की है। इस समय गेहूं की फसल में यूरिया का छिड़काव किया जाना जरूरी है। बावजूद साढ़े चार लाख किसानों को एक बोरी यूरिया पाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।
महंगे रेट में खाद दे रहे दुकानदार
ऊंचाहार। क्षेत्र के किसान राज नारायण मिश्रा, धर्मेश पाठक, राज प्रताप सिंह, अशोक मिश्रा ने बताया कि गेहूं की फसल की सिंचाई कर दी है। यूरिया की जरूरत है, लेकिन समितियों से खाद नदारद है। खाद आने के इंतजार में फसल बर्बाद हो रही है। बाजार में भी दुकानदारों के पास भी यूरिया नहीं है। जिन दुकानदारों के पास यूरिया है, वह मनमानी रेट पर खाद बिक्री कर रहे हैं। शिकायत के बाद भी उनका दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। इसको लेकर किसानों में नाराजगी भी है।
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5200 मीट्रिक टन खाद मंगाई गई
जिला कृषि अधिकारी रविचंद्र प्रकाश का कहना है कि जिले में यूरिया की कमी नहीं है। पहले से ही यहां पर 2400 म ीट्रिक टन यूरिया का स्टाक मौजूद है। ट्रांसपोर्ट में हुई दिक्कत की वजह से कुछ जगहों पर खाद नहीं पहुंच पाई है। साधन सहकारी समितियों में खाद भेजी जा रही है। 5200 मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड और की गई है। जल्द ही खाद की दो रैक भी आ जाएंगी।
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