बतरस परिवार की ओर से आयोजित सृजन संवाद में साहित्यकार अब्दुल बिस्मिल्लाह को सम्मानित करते आयोज
रायबरेली। कला, संस्कृति एवं साहित्य पर केंद्रित बतरस परिवार के मधुकरपुर स्थित प्रज्ञा भवन में आयोजित तीन दिवसीय जन-सृजन संवाद का रविवार को समापन हो गया। तीसरे व अंतिम दिन की आखिरी कड़ी के रूप में प्रतिष्ठित साहित्यकार अब्दुल बिस्मिल्लाह को बतरस-2025 सम्मान से सम्मानित किया गया। अंतिम सत्र में अब्दुल बिस्मिल्लाह के रचनाकर्म पर चर्चा की गई।
विशिष्ट अतिथि शिवमूर्ति और किशन कालजयी ने अब्दुल बिस्मिल्लाह के लेखन पर अपनी बात रखी। आकांक्षा, इंद्रदेव, शालिनी, रामजी यादव, दिव्यानंद, मृत्युंजय सिंह ने भी प्रमुख पुस्तकों का जिक्र करते हुए अब्दुल बिस्मिल्लाह के रचनाकर्म पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता रमेश सिंह और संचालन कृष्ण कुमार श्रीवास्तव ने किया। तीन दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन की शुरुआत दिलीप श्रीवास्तव के स्वागत वक्तव्य से हुई। इसके बाद संचालन का कार्यभार आराध्य श्रीवास्तव ने संभाला।
कार्यक्रम के पहले चरण में बतरस की शुरुआत हिमांशु शेखर शुक्ल के वंदन गीत से हुई। दीपिका सिंह ने स्वागत भाषण दिया। हिमांशी, शाव्या, साक्षी, संस्कृति, अम्वास्तु, अभिनंदन, प्राणिका, अक्षत, आराध्या, ओजस, अद्विजा, अंश प्रताप, आशु प्रताप, अनन्या, अनामिका और निकिता ने संगीत, नृत्य, भाषण, कविताओं के जरिये अपने भाव व्यक्त किए।