रायबरेली। जिले में सौभाग्य योजना के तहत कराए गए कार्य की गुणवत्ता की पोल खुलने लगी है। लगाए गए उपकरण फुंक रहे हैं। न खराब होने ट्रांसफार्मर को बदला जा रहा है न ही समय सीमा के अंदर खराब होने वाले मीटरों को बदला जा रहा है। ऐसे में उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें
आईडीएफ का बिजली बिल चुकाना पड़ रहा है। अधीक्षण अभियंता सौभाग्य ने कार्यदायी एजेंसी को पत्र भेजकर खराब मीटरों को बदलने के निर्देश दिए हैं।
सौभाग्य योजना के तहत जिले में करीब एक लाख 30 उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिए गए है।
गांवों की क्षमता वृद्धि करके नए ट्रांसफार्मर लगाए गए है, लेकिन कार्य में प्रयोग किए गए उपकरण घटिया हैं। यही वजह है कि उपभोक्ताओं को न तो भरपूर बिजली मिल रही है न ही उनकी समस्याएं दूर हो पा रही हैं।
जिले में करीब 100 से ज्यादा ट्रांसफार्मर खराब हुए। इसमें कुछ ट्रांसफार्मरों को बदलवा गया। शेष ट्रंासफार्मर को एजेंसी ने उतरवा तो लिया, लेकिन बदले नहीं गए। इससे उपभोक्ताओं को गांव में पहले से लगे ट्रांसफार्मरों से बिजली सप्लाई दी जा रही है। यही हाल मीटरों में हुआ है। जिले भर में 702 मीटर खराब हुए है, लेकिन अभी तक मीटरों को नहीं बदला गया।
एजेंसी के भुगतान में होगी कटौती
सौभाग्य योजना के अधीक्षण अभियंता जेबी सिंह ने कार्यदायी एजेंसी को भेजे गए पत्र में साफ कहा लगाए गए मीटरों की गारंटी पांच साल होती है। गारंटी समय के पहले खराब मीटरों को बदलवाया जाए। यदि 15 दिन के अंदर मीटरों को नहीं बदला गया तो इन मीटरों को विभाग की ओर से बदलवाया जाएगा। साथ ही मीटरों में आने वाले खर्च की कटौती कार्यदायी एजेंसी के भुगतान से जाएगी।