मनरेगा में श्रमिकों को गांवों में ही रोजगार मिल रहा है। लेकिन मजदूरी के लिए श्रमिकों को भटकना पड़ रहा है। विभाग श्रमिकों को मजदूरी देने में फिसड्डी साबित हो रहा है। करीब 40 हजार श्रमिकों की 5 करोड़ 33 लाख रुपये की मजदूरी बाकी है।
मनरेगा में सामग्री की आपूर्ति करने वालों का भी करीब दो करोड़ रुपये बकाया है। वित्तीय वर्ष पूरा होने वाला है। विभाग लक्ष्य को पूरा करने के लिए मनरेगा के कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है। दबाव बनाकर गांवों में अधिक से अधिक श्रमिकों को काम पर लगाया जा रहा है।
श्रमिकों को काम तो मिल रहा है, लेकिन काम करने के बाद श्रमिकों को मजदूरी के भुगतान के लिए भटकना पड़ रहा है। हालात यह है कि 40 हजार से अधिक श्रमिकों की मजदूरी बाकी हो गई है। फंड ट्रांस्फर ऑपरेशन(एफटीओ) न बन पाने के कारण श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नहीं मिल पा रहा है।
दो करोड़ से अधिक सामग्री ईंटा, मौरंग आदि सामान का भी भुगतान बाकी हो गया है। भुगतान न मिल पाने के कारण श्रमिक परेशान हो रहे हैं। सीडीओ अनूप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही श्रमिकों का मजदूरी का भुगतान हो जाएगा। एफटीओ बनाकर उन्हें ओके कराया जा रहा है।