परिषदीय स्कूलों में शिक्षण कार्य करने वाले शिक्षामित्रों के हिस्से में परेशानी आ रही है। 2202 शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन होने के बाद 295 शिक्षामित्रों को समायोजन का इंतजार है।
उन्हें शासन से मानदेय के लिए बजट न मिलने के कारण समय से मानदेय भी नहीं मिल पा रहा है। इससे शिक्षामित्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण इन शिक्षामित्रों के समायोजन का मामला फंसा हुआ है। जिले के परिषदीय स्कूलों में 2,497 शिक्षामित्र तैनात थे।
इसमें शासन की मंशा पर 2002 शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन कर दिया गया था। समायोजन का मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
24 फरवरी को मुकदमे में तारीख है। इस तारीख के बाद ही जिले में शेष बचे 295 शिक्षामित्रों के समायोजन का मामला आगे बढ़ सकता है। हालांकि इन शिक्षामित्रों को समय से मानदेय नहीं मिल पा रहा है।
शासन से मानदेय से बजट ही नहीं मिल पा रहा है। दो महीने का मानदेय शिक्षामित्रों को नहीं मिला है। समायोजन न होने व मानदेय न मिलने के कारण शिक्षामित्र अंदर ही अंदर आंदोलन की रणनीति बनाने में जुटे हैं।
शिक्षामित्रों को परेशानी हो रही है, लेकिन कोई भी समस्या को सुनने वाला नहीं है। शिक्षामित्र अरुण सिंह का कहना है कि विभाग के 157 पद थे।
लेकिन शिक्षामित्रों का समायोजन नहीं किया गया। पांच महीने बाद मानदेय मिला है। दो महीने का अभी भी बाकी है। कहते हैं बजट नहीं मिल रहा है।
शिक्षामित्र कमलेश सिंह का कहना है कि समायोजन के बाद भी पूरा वेतन नहीं दिया गया है। शिक्षामित्रों को मानदेय भी पूरा नहीं मिल रहा है। इससे परेशानी होती है।
शिक्षामित्र विजमावती का कहना है कि समायोजन होने के बाद भी समस्याएं कम नहीं हैं। विभाग हम लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा है।
बीएसए रामसागर पति त्रिपाठी का कहना है कि शिक्षामित्रों के मानदेय के लिए जो बजट मिला था। उसे शिक्षामित्रों को दिया गया है। शेष बजट आते ही मानदेय दिया जाएगा।
शासन से निर्देश आने के बाद समायोजन किया जाएगा। समायोजन के संबंध में निर्देश नहीं मिले हैं।