भीषण गर्मी के बीच जिले में पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। हालात यह हैं कि जिले के सभी ब्लॉकों में जल स्तर लाल निशान को पार कर गया है। करीब सात मीटर वाटर लेबल ठीक माना जाता है, लेकिन राही, हरचंदपुर, सतांव, जगतपुर, लालगंज, खीरों, सरेनी, ऊंचाहार, रोहनियां ब्लॉकों में जल स्तर 28 मीटर तक नीचे चला गया है।
अन्य ब्लॉकों में भी जलस्तर घट रहा है। इससे पांच हजार से अधिक हैंडपंपों ने पानी छोड़ दिया है। जलस्तर घटने के कारण पानी को लेकर हाहाकार मचा है। साधारण हैंडपंपों ने तो पानी देना ही लगभग बंद कर दिया है, तो इंडिया मार्का टू हैंडपंपों से भी कम पानी निकल रहा है।
आलम यह है कि एक एक बाल्टी पानी के लिए ग्रामीणों को एक हैंडपंप से दूसरे हैंडपंप के लिए चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लगातार गहराते पेयजल संकट के बाद भी संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
दो साल बारिश नहीं होने का असर अब दिखने लगा है। एक तरफ गर्मी बढ़ रही है तो दूसरी तरफ पेयजल संकट गहराता जा रहा है। जलस्तर घटने लगा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पांच हजार हैंडपंपों ने पानी छोड़ दिया है।
बावजूद जलनिगम की तरफ से हैंडपंपों को रीबोर कराने का कार्य महज कागजों तक सीमित रह गया है। शहर तक में हैंडपंप खराब पड़े हैं, जिन्हें ठीक कराने में कंजूसी बरती जा रही है। हालात यह है कि लोगों को एक-एक बाल्टी पानी के लिए जूझना पड़ रहा है।
शिवगढ़ ब्लॉक क्षेत्र में कुंभी, तरौंजा, बेड़ारू, भवानीगढ़, गूढ़ा, कसना गांवों में लगाए गए हैंडपंप खराब पडे़ हैं। इसके चलते ग्रामीणों को प्यास बुझाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। ग्रामीण दिग्विजय सिंह चौहान, राजू द्विवेदी, अजय पांडेय, केशव वर्मा का कहना है कि हैंडपंप ठीक नहीं कराए जा रहे हैं। जलस्तर नीचे जाने के कारण हैंडपंप पानी नहीं दे रहे हैं।
बरसात न होने से गंगा का जल स्तर गिर गया है। पंप कैनाल के चलने के लिए नदी का जलस्तर कम से कम 195 मीटर होना चाहिए, लेकिन यह घट कर 193 पहुंच गया है। हालात यह हैं कि पिछले वर्ष अप्रैल-मई में जहां सात-आठ पंप आराम से चल जाते थे।
वहीं इस बार चार पंप मुश्किल से चल पा रहे हैं। इन हालातों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। सिंचाई विभाग के अफसरों का कहना है कि वैसे तो हर साल जून में गंगा नदी में पानी की कमी आती थी, लेकिन इस बार फरवरी से ही जल स्तर गिरने लगा।
जो हालात जून में होते थे, इस बार अप्रैल में ही हो गए। अप्रैल से ही पंप कैनाल को बेहद कम पानी मिल रहा है। कई बार तो पंप एयर ले लेता हैं, जिससे आपूर्ति बाधित हो जाती है। लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता आरके गुप्ता का कहना है कि दो साल से पर्याप्त बारिश न होने के कारण जलस्तर घटा है।
इस वजह से लोगों को पेयजल के संकट का सामना करना पड़ रहा है। विभाग की तरफ से गिरते वाटर लेबल को ऊपर लाने के लिए नए तालाबों की व्यवस्था की जा रही है। चेकडैम भी बनवाए जा रहे हैं। सिंचाई खंड-6 के एक्सईएन एकेसिंह ने बताया कि गंगा में पानी की कमी से समस्या आ रही है। इस समय चार पंप ही चल पा रहे हैं। पिछली बार बारिश कम होने की वजह से ऐसा है। उम्मीद है कि इस बार बारिश होगी। बारिश होने के बाद हालात सुधरेंगे।