बदलता मौसम लाडलों पर भारी पड़ने लगा है। मौसम की मार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार को 25 बच्चे डायरिया और बुखार की चपेट में आ गए। इसमें से 10 गंभीर बच्चों को जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती कराया गया है।
अप्रैल से ही गर्मी अपने शबाब पर है। गर्मी से खासकर मासूम बच्चों को न सिर्फ परेशानी झेलनी पड़ रही है, बल्कि वह डायरिया, बुखार की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल में 45 बेड का बच्चा वार्ड है। मौजूदा समय में 30 बच्चे वार्ड में भर्ती हैं।
रविवार को डायरिया से पीड़ित अन्नू निवासी पूरे जुबराज जगतपुर, आर्या (डेढ़) निवासी पंडित का पुरवा मजरे खागीपुर सड़वा राही, गौरी निवासी तेजगांव लालगंज, रूबल निवासी बसाढ़ राही, गौरी (नौ माह) पुत्री अनूप निवासी मंचितपुर अमावां, आलिया निवासी तेलियाकोट और बुखार से पीड़ित शालिनी (2) निवासी रायपुर, आदिल निवासी तिलोई, खजीजा (9 माह), उसके भाई जियाउल (1) निवासी गोंदवारा डीह को बच्चा वार्ड में भर्ती कराया गया है।
इसके अलावा काजल, संध्या, अमरेश, ऊदल, रहमाना, साजिद, अनुज, दिव्येश समेत 15 बच्चों को डायरिया, बुखार से पीड़ित होने पर इमरजेंसी कक्ष में इलाज किया गया। एक तरफ बच्चे डायरिया, बुखार से पीड़ित हैं। वहीं बच्चा वार्ड में बाहर से दवाएं लिखी जा रही हैं।
अभिभावक संतोष कुमार, अमरेंद्र व दिनेश कुमार ने बताया कि ग्लूकोज तो अस्पताल में उपलब्ध है। लेकिन बाकी दवाएं बाहर से मंगाई जा रही है। सभी का कहना है कि अस्पताल से ही दवाएं मुहैया कराएं जाएं, ताकि बच्चों का इलाज अच्छी तरीके से हो सके।
जिला अस्पताल के सीएमएमस डॉ. एनके श्रीवास्तव का कहना है कि मौसम की वजह से बच्चे डायरिया, बुखार की चपेट में आ रहे हैं। बच्चों की बढ़ती तादाद को देखते हुए पहले से ही इलाज की पूरी व्यवस्था बच्चा वार्ड में कर दी गई है।
ग्लूकोज की बोतल अधिक संख्या में रखवा दी गई हैं। डॉक्टरों और अन्य स्टाफ से बच्चों पर पूरी नजर रखने और बाहर से दवाएं न लिखने के निर्देश दिए हैं। मौसम की मार को देखते हुए अभिभावकों को बच्चों के प्रति सजगता बरतनी चाहिए। खानपान पर ध्यान देना चाहिए।