पांच लाख 44 लाख से अधिक लोगों को बीमार होने, गर्भवती होने और दो वर्ष से बच्चों को दवा नहीं खिलाई जाएगी। अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री, आशा बहू के साथ ही अन्य कुल 8,863 कर्मचारियों को लगाया गया है।
पांच से छह साल तक हर साल एक-एक खुराक दवा खाने से फाइलेरिया से बचा जा सकता है। पिछले कई वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में पहुंचकर लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाती है।
इस बार भी यह अभियान 17 से 19 दिसंबर तक चलेगा। इसके लिए तैयारियों को पूरा कर लिया गया है। सीएमओ ने सभी सीएचसी अधीक्षकों को शत प्रतिशत लक्ष्य की पूर्ति करने के आदेश दिए हैं।
लापरवाही व लक्ष्य के सापेक्ष पूर्ति न मिलने पर अधीक्षकों पर कार्रवाई होगी। दवा भी सीएचसी व पीएचसी पर पहुंचा दी गई है।
सीएमओ डॉ. राकेश कुमार यादव ने बताया कि फाइलेरिया की दवा खिलाने के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। सीएचसी पीएचसी में दवाएं पहुंचाकर अधीक्षकों को शत प्रतिशत दवा का वितरण कराने का आदेश दिया गया है।
लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि क्यूसेक मादा मच्छर के काटने से फाइलेरिया होता है। फाइलेरिया के कीडे़ को खत्म करने के लिए अब तक कोई दवा नहीं बना है।
शरीर में बनने वाले इसके लारवे को खत्म किया जा सकता है। जिन लोगों को फाइलेरिया है, उन लोगों पर डीईसी की दवा खाने पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन वे इससे घबराएं नहीं।
असर पड़ने का मतलब ही है कि शरीर के अंदर मौजूद फाइलेरिया के लारवा मर रहे हैं। इससे निश्चित ही आराम होगा। जिन लोगों को फाइलेरिया नहीं है, उन लोगों को यह दवा फाइलेरिया से प्रभावित होने से बचाएगी।