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चहेती फर्म को थमा दिया 2.34 करोड़ का काम

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रायबरेली। शासन की आठ राजकीय निर्माण एजेंसियों को ठिकाने लगाकर स्वास्थ्य विभाग में 2.34 करोड़ के हेल्थ वेलनेस सेंटरों के निर्माण का काम चहेती फर्म को दे दिया गया। काम पाने वाली पैक्सपेड फर्म को आज तक स्वास्थ्य विभाग में एक रुपये का काम नहीं दिया गया। तीन साल पहले इसे काम देने के प्रयास में अफसरों पर कार्रवाई तक की नौबत आ गई थी। इस संस्था को पूर्व में काम देने पर रोक भी जिले में लगाई जा चुकी है। चर्चा है कि हाकिम के दबाव में गैर राजकीय संस्था को सेटिंग-गेटिंग करके काम दिया गया। हालांकि मामला शासन स्तर तक पहुंचने के बाद खेल में शामिल अफसरों में हड़कंप मच गया है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को 2.34 करोड़ की लागत के 52 हेल्थ वेलनेस सेंटर मिले। पूर्व में 100 से अधिक हेल्थ वेलनेस सेंटरों का निर्माण राजकीय निर्माण एजेंसी पैकफेड करा चुकी है, लेकिन नए मिले 52 सेंटरों का काम राजकीय निर्माण एजेंसी उत्तर प्रदेश विधायन एवं निर्माण सहकारी संघ (पैकफेड) को न देकर गैर राजकीय एजेंसी उत्तर प्रदेश विधायन शीत गृह संघ लिमिटेड (पैक्सफेड) को दे दिया गया है। चर्चा है कि स्वास्थ्य विभाग के अफसर संस्था को काम देने पर राजी नहीं थे, क्योंकि शासन की मंशा है कि निर्माण कार्यों का काम राजकीय निर्माण एजेंसियों से ही कराया जाए। जिले के आला अधिकारियों ने शासन की मंशा को ध्यान न देकर 2.34 करोड़ के काम के लिए नई संस्था का चयन कर लिया। संस्था को पहली किस्त देकर निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया गया है।
पैक्सफेड को वर्ष 2013 में काम देने पर लगी थी रोक
उत्तर प्रदेश विधायन शीत गृह संघ लिमिटेड (पैक्सफेड) को वर्ष 2013 में तत्कालीन सीडीओ ने काम देने पर रोक लगाई थी। हालांकि सांसद निधि से दीवानी परिसर में अधिवक्ता कक्ष बनाने के लिए दिए गए बजट को वर्ष 2019 में तत्कालीन डीएम नेहा शर्मा ने वापस ले लिया था। साथ ही अक्तूबर 2019 में तत्कालीन सीएमओ डॉ. डीके सिंह ने पत्रावली में छेड़छाड़ करके गैर राजकीय संस्था पैक्सफेड को तीन करोड़ का काम देने का प्रयास किया था। मामला संज्ञान में आने पर तत्कालीन डीएम ने पत्रावली को निरस्त करके राजकीय संस्था पैकफेड को काम देकर तत्कालीन सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। वर्ष 2019 के बाद कई बार पैक्सफेड को काम देने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी भी डीएम ने उसे काम देने की हिम्मत नहीं जुटाया। पहली बार काम दिए जाने के बाद मामला गरमा गया है।
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प्रदेश सरकार की यह आठ राजकीय एजेंसियां
प्रदेश सरकार की ओर से आठ राजकीय निर्माण एजेंसियां घोषित हैं। इन्हीं राजकीय निर्माण एजेंसियों से ही सरकारी काम करवाने के आदेश भी दिए गए हैं। राजकीय निर्माण एजेंसियों में लोक निर्माण विभाग, पैकफेड, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग, यूपीआरएनएन, सीएंडडीएस, यूपीपीसीएल, आवास विकास परिषद, समाज कल्याण निर्माण निगम शामिल हैं। शासन से इन्हीं एजेंसियों को ही राजकीय काम देने के आदेश हैं।
शासनादेश के अनुसार सरकारी कार्यों का काम शासन से तय राजकीय निर्माण एजेंसियों को दिया जाना चाहिए। जिलाधिकारी, जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष होते हैं। 52 हेल्थ वेलनेस सेंटरों के संबंध में समिति के स्तर पर पैक्सफेड संस्था का चयन किया गया है। एजेंसी को पहली किस्त देकर निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया गया है। -डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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