इससे करीब डेढ़ लाख बच्चे भूखे घरों को लौट रहे हैं। जिन पर बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने का जिम्मा है, वह इसको लेकर गंभीर नहीं है।
पंचायत चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी लगने और कन्वर्जन कॉस्ट न होने के साथ ही ग्राम प्रधानों के चुनाव की तैयारी में लगे होने के चलते स्कूलों में एमडीएम ठप है।
जिले में पूर्व और प्राथमिक स्कूलों की संख्या 2700 है। इसमें करीब सवा तीन लाख बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दोपहर का भोजन मिल सके, इसके लिए एमडीएम व्यवस्था है।
इधर, पंचायत चुनाव चल रहा है, जिसमें शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। साथ ही एक महीने से कन्वर्जन कॉस्ट भी नहीं आई है। ऐेसे में लगभग 1200 स्कूलों में एडीएम का चूल्हा बुझ गया है।
इन 1200 स्कूलों में पढ़ने वाले डेढ़ लाख बच्चे भूखे ही घरों को लौट जाते हैं। राही, अमावां, शिवगढ़, सरेनी, हरचंदपुर, दीनशाहगौरा, ऊंचाहार, सलोन, डीह, छतोह ऐसे ब्लॉक क्षेत्र हैं, जहां के स्कूलों में एमडीएम नहीं बन रहा है। एडीएम बनाने को लेकर क्षेत्रीय लोग आवाज भी उठा रहे हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।
बीएसए रामसागर पति त्रिपाठी ने बताया कि पंचायत चुनाव के कारण एमडीएम प्रभावित हुआ है। हालांकि जिन ब्लॉक क्षेत्रों में चुनाव हो गए हैं, वहां एमडीएम सुचारु रूप से चल रहा है।
जहां पर भी एमडीएम नहीं बन रहा है, वहां पर भी जल्द बच्चों को भोजन की व्यवस्था कराई जाएगी। कनवर्जन कास्ट की व्यवस्था भी कराई जाएगी।