रायबरेली। शहर में पेयजल संकट से नागरिकों को राहत दिलाने के लिए शुरू की गई अमृत योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।
सवा अरब की योजना पर पानी की तरह रुपया बहाया गया, लेकिन दो लाख आबादी की प्यास अब तक बुझ नहीं पाई है। ईओ ने संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर को पत्र लिखकर योजना का कार्य सही ढंग से कराए जाने की मांग की है।
योजना से पालिका क्षेत्र में 117 करोड़ की नई पाइप लाइन बिछाई गई है। 34 वार्डों में पाइप लाइनों का नवीनीकरण के साथ पेयजल आपूर्ति के लिए ट्यूबवेल और पानी की टंकियां बनवाई गई हैं।
110 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए हैं, लेकिन भरपूर पानी नहीं मिल पाया। ईओ के पत्र पर कार्यदायी संस्था जलनिगम के जेई आशीष बिरला का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया, लेकिन नहीं उठाया।
कार्यदायी संस्था पर यूं उठाए गए सवाल
फिरोज गांधी नगर, तिलक नगर, कल्लू का पुरवा स्थित ओवरहेड टैंकों में लीकेज है। जवाहर विहार, किला सीवर, टाऊन हाल एवं पुलिस लाइन का ओवरहेड टैंक चालू नहीं हुआ है।
कप्तान का पुरवा, आचार्य द्विवेदी नगर, राना नगर, मानक नगर में पाइप लाइन, पानी कनेक्शन की व्यवस्था नहीं की गई है। पालिका ने प्रोजेक्ट मैनेजर को भेजे पत्र में कहा है कि चकधौरहा पंप नंबर दो, इंदिरा नगर पुलिस चौकी, प्रगतिपुरम, साईं मंदिर के पास, आनंद नगर, टंकी के पास एवं अन्य स्थानों पर लीकेज है, जिन्हें ठीक नहीं कराया जा रहा है।
पत्र के जरिए कराया गया अवगत: मुशीर अहमद
नगर पालिका के ईओ मुशीर अहमद ने बताया कि योजना में मानक के तहत कार्य नहीं कराया गया है। सवा अरब की योजना में 110 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन कई मोहल्लों जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर को पत्र के जरिए खामियों के बारे में अवगत कराया गया है।