फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये हैं दबंग राजा, विवादों से हैं पुराना नाता

Mon, 04 Mar 2013 11:49 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह ऊर्फ राजा भैया एक बार फिर सुर्खियों में हैं। शनिवार की रात प्रतापगढ़ जिले के बलीपुर गांव में हुए खूनी संघर्ष में राजा भैया का भी नाम आ गया है।
विज्ञापन


क्षेत्राधिकारी (सीओ) जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद की तहरीर पर राजा भैया समेत पांच लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया। राजा भैया को हत्या की साजिश (120 बी) का आरोपी बनाया गया है। आरोपों के बाद राजा भैया ने सोमवार को खाद्य व रसद मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।

सीओ की पत्नी ने आरोप लगाया कि राजा भैया और उनके लोग पहले से ही उनके पति को धमकी दे रहे थे। वारदात की रात उन्हीं लोगों ने उन्हें रोका और पीटने के बाद गोली मार दी।
विज्ञापन


अपराध और विवादों से राजा भैया का ये नाता नया नहीं है। कुंडा से लगातार पांच बार निर्दलीय विधायक चुने गए राजा भैया पर अब तक आठ मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें हत्या के प्रयास, डकैती, लूट, बलवा, मारपीट, शांति भंग की आशंका जैसे मामले हैं।

2002 में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के आदेश पर भाजपा विधायक पूरन सिंह को जान से मारने की धमकी के आरोप में उन्हें पहली बार गिरफ्तार किया गया था। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को रद्द कर दिया। राजा भैया इसके बाद सुर्खियों में आ गए और उनके अपराधों की लिस्ट लंबी होती गई।

2003 में राजा भैया के घर पर छापा पड़ा, जिसमें हथियार और विस्फोटक बरामद हुए। इसके कुछ दिनों बाद ही पड़े एक और छापे में पुलिस ने राजा भैया के तालाब से एक व्यक्ति का कंकाल बरामद किया।

मायावती ने इसके बाद उन्हें आतंकी घोषित कर दिया और उनके खिलाफ आतंकवाद निवारण अधिनियम (पोटा)
के तहत मामला दर्ज किया गया।

राजा भैया के साथ उनके पिता उदय प्रताप सिंह और भाई अक्षय प्रताप के खिलाफ पोटा के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया गया।

हालांकि 2003 के अंत में मुख्यमंत्री बनने के बाद समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव शपश ग्रहण के 25 मिनट के अंदर ही उनके खिलाफ पोटा के तहत चल रहा मुकदमा वापस ले लिया। मुलायम ने राजा भैया के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट के तहत दायर मुकदमों को वापस लेने के आदेश दिए।


2004 में उनके आवास पर छापा डालने वाले पुलिस अधिकारी आरएस पांडेय की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। सीबीआई आज भी इस मामले की जांच कर रही है।

2005 में मुलायम सरकार में उन्हें खाद्य और रशद आपूर्ति मंत्री बनाया गया है। आपराधिक मामलों के बावाजूद उन्हें प्रदेश सरकार ने जेड प्लस सुरक्षा दी।

2005 में सर्वोच्च न्यायालय ने तथा पोटा रिव्यू कमेटी ने राजा भैया और उनके पिता पर से पोटा हटाए जाने का आदेश रद्द कर उन पर दोबारा मुकदमा चलाने का निर्देश दिया।

राजा भैया को इसके बाद मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। 14 नवंबर, 2005 को इस मामले में वे दोबारा गिरफ्तार किए गए। हालांकि इसके एक महीने बाद उन्हें जमानत मिल गई और वे जेल से बाहर आ गए। मुलायम सिंह ने उन्हें दोबारा मंत्री बनाने में देर नहीं की और एक महीने बाद वे खाद्य एवं रसद विभाग के मंत्री बने।

2007 में राजा भैया कुंडा विधानसभा से लगातार चौथी बार जीते। लेकिन विधानसभा चुनावों बसपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के कारण इस बार वे सत्ता के करीब नहीं पहुंच पाए।

2012 चुनावों में सपा बहुमत के साथ सत्ता में आई और राजा भैया के दिन फिर बदले। अखिलेश यादव ने उन्हें कैबिनेट में शामिल किया और उन्हें जेल मंत्रालय सौंपा गया।
विज्ञापन


लेकिन विवादों के कारण उन्हें बाद में जेल मंत्रालय से हटा कर खाद्य और रशद आपूर्ति का महकमा सौंपा गया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें