पीलीभीत का बरखेडा क्षेत्र अपने चीनी मिल की वजह से पूरे प्रदेश में जाना जाता है। बरखेडा में चीनी मिल, उन्नत कृषि व्यवस्था होने के बावजूद यह इलाका विकास के क्रम में काफी पीछे है। यहां किसानों के समय पर गन्ने का पैसा नहीं मिलता, रोजगार के साधन नही हैं, युवा पलायन के मजबूर है। क्षेत्र की जनता इन समस्याओं से त्रस्त आ चुकी है। इन समस्याओं से निजात के लिए जरुरी है कि समाज से अच्छे लोग राजनीति में आए। अच्छे लोगों के हाथों में राजनीति आ जाए तो अभूतपूर्व परिवर्तन हो सकते हैं। ऐसे में बरखेडा क्षेत्र की जनता के लिए डॉ. शैलेन्द्र गंगवार एक उम्मीद की किरण बनकर उभरें हैं।
पीलीभीत के प्रमुख सर्जन डॉ. शैलेन्द्र का कभी कोई सियासी इतिहास नहीं रहा। एक सामान्य परिवार में जन्मे शैलेन्द्र ने आगरा मेडिकल कालेज से एमबीबीएस की डिग्री ली और फिर लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कालेज से एमएस भी किया। डॉ. शैलेन्द्र ने अपने डॉक्टरी कैरियर की शुरुआत के लिए पीलीभीत की मिट्टी को प्राथमिकता दी जहां के बूते वो किसी काबिल बने थे। आज पीलीभीत और आसपास के इलाकों में डॉ शैलेन्द्र जाना पहचाना नाम हैं।
डॉ शैलेन्द्र का गोदान हास्पिटल तो पीलीभीत में दर्द से तड़पते मरीजों का आखिरी सहारा है, जहां हर रोज हकीकी जरूरतमंदों के आपरेशन तक बिना पैसों के किये जाते हैं। मामूली इलाज के लिए तड़पते मरीजों के दर्द ने ही दरअसल पहली बार डॉ शैलेन्द्र के मन में सियासत का बीज डाला। ताकि इतनी ताकत हासिल की जा सके, कि व्यवस्था परिवर्तन में भागीदारी हो।
छुरी-नश्तर को किनारे रख लोगों का दु:ख-दर्द दूर करने सियासत में कदम रखने वाले डॉ. शैलेन्द्र का वादा है कि अगर जनता उन्हें अपना प्रतिनिधि बनने का मौका देती है तो वो क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास करेंगे। गन्ना किसानों को समय पर भुगतान, क्षेत्र के लोगों को रोजगार, और हर गांव तक पक्की सड़कें बनावाना इनकी प्राथमिकता में सर्वोपरि है। साथ ही इनका वादा है कि ये लोगों की दु:खों/समस्याओं को सिर्फ राजनीतिक स्तर पर ही नहीं अपितु व्यक्तिगत स्तर पर भी दुर करने का प्रयास करेंगे।
स्वच्छ एवं स्वस्थ राजनीति के मकसद से सियासत में उतरे डॉ. शैलेन्द्र इस बार बसपा से बरखेडा विधानसभा सीट से उम्मीदवार हैं। क्षेत्र में उनकी उम्मीदवारी भी काफी मजबुत नजर आ रही हैं, इसका अंदाजा बरखेडा के न्यूरिया, पौटा, खमड़िया आदि गांवों में इनकी सभाओं में हजारों की तादाद में जुटी भीड़ को देखकर लगाया जा सकता है। लेकिन आखिरी फैसला तो चुनाव के दिन ही होगा, आपको क्या लगता है बरखेडा की जनता डॉ. शैलेन्द्र को अपने प्रतिनिधि के रुप में चुनेगी?