डॉ. सोने लाल पटेल मेडिकल कॉलेज के चर्चित ऑर्थाे सर्जन ने बीते 14 अगस्त को रंजीतपुर चिलबिला की महिला सुलोचना की स्पाइन सर्जरी की थी। डॉक्टर ने इसके सफलता का श्रेय भी लिया था, लेकिन 63 दिन बाद मरीज की मौत होने से अब आरोप और प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
सुलोचना पांडेय की सड़क हादसे में रीढ़ की हड़्डी दो जगह से टूट गई थी। इससे उनके शरीर का एक हिस्सा सुन्न पड़ गया। दोनों पैरों की ताकत खत्म हो गई। निजी अस्पताल में आराम न होने पर मेडिकल कॉलेज के आर्थो विभाग में डॉ. सचिन को दिखाया। वह स्पाइन सर्जरी करने को तैयार हो गए। अपने सहयोगी डॉ. गौरव, डॉ. राकेश चौरसिया, स्टाफ नर्स बबना और रुचि के सहयोग से आर्थो सर्जन ने रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के सप्ताहभर बाद मरीज की हालत बिगड़ने लगी। इससे उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया। परिजनों ने वहां कुछ दिनों तक इलाज कराया, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण सुलोचना को लेकर प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज लौट आए। यहां इलाज के दौरान सुलोचना ने दम तोड़ दिया।
क्या बोले डॉक्टर
सुलोचना को पहले से पेट में दिक्कतें थीं। उसे शौच के रास्ते से ब्लीडिंग होती थी। लीबर में भी दिक्कतें थी, जिसका पहले से भी इलाज चल रहा था। हमने ऑपरेशन में कोई कमी नहीं छोड़ी थी।
- डॉ. सचिन कुमार, आर्थो सर्जन मेडिकल कॉलेज।