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रेडियोलॉजिस्ट न होने से डेढ़ साल से डिब्बे में बंद 25 लाख की मशीन,

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Ultrasound machines worth 25-25 lakhs are locked in the box for one and a half year due to lack of radiologist
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जिले के रेफरल सेंटर और राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय की महिला विंग में 25-25 लाख रुपये की अल्ट्रासाउंड मशीनें वर्षों बाद भी डिब्बों में पैक हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों का फ्री में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। उन्हें एक हजार रुपये खर्च कर निजी सेंटरों पर जांच करानी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर रेडियोलॉजिस्ट न होने का रोना रो रहे हैं। औसतन हर रोज 200 मरीजों का अल्ट्रासाउंड अस्पताल प्रशासन निजी केंद्रों में करवा रहा है।
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जिले में मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू हो गया है। इसके अलावा 27 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें तीन रेफरल सेंटर भी हैं। बीते कई साल से जिले के सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड की सुविधा मरीजों को नहीं मिल रही है। जबकि पेट में दर्द जैसी बीमारी बताते ही डॉक्टर सबसे पहले पर्चे पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहते हैं। वहीं, गर्भवती महिलाओं का पांच से सात बार महिला चिकित्सक अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए सलाह देती हैं।
मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में दो चिकित्सकों को अल्ट्रासाउंड करने के लिए शासन स्तर से ट्रेनिंग दी गई है। इसके बाद भी 25 लाख की लागत से खरीदी गई अल्ट्रासाउंड मशीन डिब्बे में पैक कर रखी गई है। गर्भवती महिलाओं तक की जांच नहीं की जाती है। बताया जाता है कि रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में जांच नहीं हो पाती है। महज प्रत्येक माह की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं का मुफ्त अल्ट्रासाउंड एक प्राइवेट सेंटर पर भेजकर चिकित्सक कराते हैं।
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इसके अलावा मेडिकल कॉलेज के पुरुष विंग में रेडियोलॉजिस्ट के होते हुए भी मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच नहीं की जा रही है। मरीजों को दो चिह्नित अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर जांच के लिए भेजा जाता है। जांच के नाम पर संचालक मरीजों से सामान्य अल्ट्रासाउंड के लिए एक हजार तो रंगीन के लिए दो से ढाई हजार रुपये तक वसूल रहे हैं।
रेफरल सेंटर लालगंज, कुंडा और पट्टी में भी रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में अल्ट्रासाउंड मशीनें धूल फांक कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसके संचालन की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कारण यह है कि प्राइवेट सेंटर पर मरीजों को जांच के लिए भेजने पर डॉक्टरों को भी कमीशन मिलता है।
गर्भवती महिलाओं के इन मरीजों को पड़ती है अल्ट्रासाउंड की जरूरत
गर्भवती महिलाओं के अलावा हैपेटाइटिस बी व सी, लीवर में दिक्कत, पेट में इंफेक्शन, पथरी य आंत में सूजन एवं अन्य गंभीर हालत के पेट रोगियों को अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है। अस्पताल में हर रोज ओपीडी में 100 से 150 गर्भवती महिलाएं एवं 40 से 50 पेट रोगी आते हैं। यह आंकड़ा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय का है। बाकी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र का अलग है। निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड कराने पर मरीजों को एक हजार से ढाई हजार रुपये तक चुकाने करने पड़ते हैं।
रेडियोलॉजिस्ट मांग रहे ज्यादा वेतन
स्वास्थ्य विभाग की ओर से रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए सालाना 25 लाख रुपये का पैकेज निर्धारित है, लेकिन इस पैकेज में कोई भी रेडियोलॉजिस्ट आने के लिए तैयार नहीं है। विभाग के सूत्र बताते हैं कि रेडियोलॉजिस्ट 40 से 45 लाख रुपये सालाना पैकेज की मांग कर रहे हैं। उधर, विभाग इतना पैकेज देने के लिए तैयार नहीं है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए एक प्राइवेट सेंटर को अटैच किया गया है। जहां प्रत्येक माह की नौ तारीख को मुफ्त में शासन के आदेश पर जांच कराई जाती है। सीएचसी में रेडियोलॉजिस्ट के न होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है। जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट मिलने की उम्मीद है। डॉक्टर, एस हैदर, डिप्टी सीएमओ
प्रताप बहादुर चिकित्सालय के पुरुष विंग में मरीजों की जांच की जाती है। मरीज जांच कराएं या फिर न कराएं, इसके लिए मरीज पर दबाव नहीं बनाया जा सकता है। महिला विंग में रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। इसलिए जांच नहीं की जा रही है। हालांकि सभी चिकित्सकों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी मरीज की बाहर से जांच नहीं कराएंगे। डॉक्टर आर्य देशदीपक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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